पुणे की नौकरी का अजब सवाल, “बिना शर्त हफ्ते में 72 घंटे काम मंजूर…
Strange question about Pune's job, "72 hours of work per week is accepted without any conditions...

Breaking Today, Digital Desk : पुणे की एक टेक कंपनी इन दिनों सुर्खियों में है, लेकिन किसी नए प्रोडक्ट या सर्विस के लिए नहीं, बल्कि नौकरी के लिए पूछे गए एक अजीबोगरीब सवाल की वजह से। कंपनी ने अपने हायरिंग प्रश्नावली में उम्मीदवारों से पूछा कि क्या वे “बिना किसी अगर-मगर के” हफ्ते में 72 घंटे काम करने में सहज होंगे? यह मामला लिंक्डइन पर एक यूजर द्वारा पोस्ट किए जाने के बाद आग की तरह फैल गया और सोशल मीडिया पर एक नई बहस को जन्म दे दिया।
यह घटना उस वक्त सामने आई है जब भारत में काम और निजी जीवन के बीच संतुलन को लेकर पहले से ही काफी चर्चा हो रही है। एक तरफ जहां दुनिया के कई देश कर्मचारियों की भलाई के लिए हफ्ते में काम के दिन कम कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत में कुछ कंपनियों की ऐसी नीतियां लोगों को हैरान कर रही हैं।
क्या था पूरा मामला?
सोशल मीडिया पर वायरल हुए पोस्ट के मुताबिक, पुणे स्थित इस कंपनी ने उम्मीदवारों से एक ऑनलाइन फॉर्म में यह सवाल पूछा, “क्या आप ऑफिस से (दिन में 12 घंटे, हफ्ते में 6 दिन) काम करने की संस्कृति के साथ सहज होंगे, जिसमें कोई अगर-मगर नहीं होगी?” इस सवाल ने नौकरी ढूंढ रहे युवाओं और पेशेवरों के बीच हलचल मचा दी। कई लोगों ने इसे “शोषक” और “अमानवीय” करार दिया।
सोशल मीडिया पर लोगों ने इस कंपनी की जमकर आलोचना की। एक यूजर ने लिखा, “जब हम बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस के लिए लड़ रहे हैं, तब ऐसी कंपनियां हमें पीछे धकेल रही हैं।” कई लोगों ने भारत में श्रम कानूनों को और मजबूत करने की भी मांग की, ताकि कर्मचारियों के हितों की रक्षा हो सके।
यह मामला इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति के उस बयान की भी याद दिलाता है, जिसमें उन्होंने देश के विकास के लिए युवाओं को हफ्ते में 70 घंटे काम करने की सलाह दी थी। इस बयान पर भी समाज के अलग-अलग वर्गों से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई थीं।
हालांकि, यह पहली बार नहीं है कि किसी कंपनी की कार्य संस्कृति पर सवाल उठे हैं। इस तरह की घटनाएं कर्मचारियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दबाव को उजागर करती हैं। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया ہے कि “हसल कल्चर” (हमेशा काम में जुटे रहने की संस्कृति) और एक स्वस्थ जीवन के बीच संतुलन बनाना कितना जरूरी है।






