
Breaking Today, Digital Desk : प्रसव की खुशी कब एक अंतहीन दर्द के सिलसिले में बदल जाए, कोई नहीं जानता। ऐसी ही एक दर्दनाक कहानी है एक महिला की, जिसे सिजेरियन ऑपरेशन के चार साल बाद पता चला कि उसके पेट में डॉक्टर एक सर्जिकल स्पंज भूल गए थे। यह घटना न केवल चिकित्सा लापरवाही की एक गंभीर मिसाल है, बल्कि उस माँ के असीम कष्ट और संघर्ष को भी बयां करती है, जिसे चार सालों तक असहनीय पीड़ा से गुजरना पड़ा।
यह सब एक बच्चे के जन्म की खुशी के साथ शुरू हुआ। सिजेरियन डिलीवरी के बाद, महिला को लगातार पेट में दर्द और बेचैनी रहने लगी। जब भी उसने डॉक्टरों से संपर्क किया, तो उसे यह कहकर टाल दिया गया कि यह ऑपरेशन के बाद होने वाला सामान्य दर्द है और समय के साथ ठीक हो जाएगा। लेकिन समय के साथ दर्द कम होने के बजाय और भी बढ़ता गया। धीरे-धीरे उस जगह पर एक गांठ बन गई और दर्द इतना हो गया कि उसका चलना-फिरना और सामान्य जीवन जीना भी मुश्किल हो गया।
इन चार वर्षों में, उसने अनगिनत डॉक्टरों से सलाह ली और कई दवाएं खाईं, लेकिन कोई भी उसकी समस्या की असली वजह का पता नहीं लगा सका। अंत में, जब एक डॉक्टर ने सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह दी, तब जाकर इस भयावह सच्चाई का खुलासा हुआ। रिपोर्ट में पता चला कि उसके पेट में एक सिजेरियन स्पंज मौजूद था, जो अब एक गांठ का रूप ले चुका था और संक्रमण का कारण बन रहा था।
यह खुलासा परिवार के लिए एक झटके जैसा था। जिस स्वास्थ्य व्यवस्था पर उन्होंने भरोसा किया था, उसी की लापरवाही ने महिला को मौत के मुंह में धकेल दिया था। इसके बाद, महिला को एक और बड़े ऑपरेशन से गुजरना पड़ा ताकि उस स्पंज को बाहर निकाला जा सके। इस पूरी प्रक्रिया ने उसे न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक और आर्थिक रूप से भी तोड़ दिया।
चिकित्सा विज्ञान में इस तरह की घटना को “गॉसिपिबोमा” कहा जाता है, और यह डॉक्टरों की एक गंभीर लापरवाही मानी जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा बनाए गए सर्जिकल सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन न करने के कारण ऐसी घटनाएं होती हैं, जो मरीजों की जान जोखिम में डाल सकती हैं। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर मरीज अस्पतालों में कितने सुरक्षित हैं और इस तरह की लापरवाहियों के लिए कौन जिम्मेदार है।






