
Breaking Today, Digital Desk : दिल्ली विधानसभा का सामान्य दिन उस समय एक अप्रत्याशित मोड़ ले लिया जब एक ऐतिहासिक दावे को लेकर छिड़ी बहस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट ‘चैटजीपीटी’ (ChatGPT) का जिक्र हुआ. यह बहस विधानसभा परिसर के एक हिस्से को लेकर थी, जिसे 2021 में तत्कालीन स्पीकर राम निवास गोयल ने ब्रिटिश काल का ‘फांसी घर’ बताया था. हालांकि, इस दावे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिसमें अंततः स्पीकर ने चैटजीपीटी को एक ‘भ्रामक’ स्रोत करार दिया.
यह पूरा विवाद विधानसभा भवन के नीचे मिली एक संरचना को लेकर है. 2022 में इस जगह का उद्घाटन एक पट्टिका के साथ किया गया था, जिसमें यह बताया गया था कि ब्रिटिश शासन के दौरान इसका इस्तेमाल फांसी देने के लिए किया जाता था. मंगलवार को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने इस दावे को ऐतिहासिक रूप से गलत बताते हुए चुनौती दी. उनका कहना था कि यह जगह असल में एक ‘टिफिन रूम’ थी, जहां सामान ऊपर-नीचे ले जाने के लिए एक लिफ्ट लगी थी.
बहस उस समय और तेज हो गई जब आम आदमी पार्टी (आप) के एक विधायक ने अपने दावे के समर्थन में चैटजीपीटी द्वारा दी गई जानकारी का हवाला दिया. इस पर स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि चैटजीपीटी विश्वसनीय स्रोत नहीं है क्योंकि यह इंटरनेट पर पहले से मौजूद जानकारी को ही इकट्ठा करता है, जिसमें गलत दावे भी शामिल हो सकते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे सबूत के तौर पर नहीं माना जा सकता.
सदन में मौजूद PWD मंत्री परवेश वर्मा ने भी पिछली सरकार पर तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि अभिलेखागार से मिले नक्शों में इस जगह के फांसी घर होने का कोई सबूत नहीं मिलता. दूसरी ओर, ‘आप’ विधायकों ने इस मुद्दे को उठाने के समय पर सवाल खड़ा किया और कहा कि सदन को दिल्ली के अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.
यह बहस तब और दिलचस्प हो गई जब यह पता चला कि उस समय ब्रिटिश संसद का एक प्रतिनिधिमंडल भी दर्शक दीर्घा में मौजूद था और इस पूरी कार्यवाही का गवाह बन रहा था. स्पीकर गुप्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि विधानसभा से लाल किले तक किसी सुरंग के होने का दावा भी गलत है और जिसे सुरंग बताया जा रहा है, वह वास्तव में वेंटिलेशन के लिए बने डक्ट हैं.






