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आप सोच भी नहीं सकते, नोटबंदी में ऐसे भी हुए थे 450 करोड़ के नकद सौदे…

You can't even imagine, there were cash transactions worth Rs 450 crores during demonetisation...

Breaking Today, Digital Desk : हाल ही में बिहार की राजनीति में एक छोटी सी हलचल देखने को मिली, जब आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कांग्रेस की केरल इकाई के एक बयान से अपनी पार्टी को दूर कर लिया। दरअसल, केरल कांग्रेस ने बीफ पर एक विवादित पोस्ट शेयर की थी, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा। ऐसे में जब तेजस्वी से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने साफ कहा कि उनकी पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

तेजस्वी ने सीधे तौर पर कहा कि “यह केरल कांग्रेस का बयान है, आरजेडी का नहीं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि हर राज्य की अपनी अलग राजनीतिक परिस्थितियां और मुद्दे होते हैं, और एक राज्य की इकाई के बयान को पूरे गठबंधन पर थोपना सही नहीं है। यह एक ऐसा बयान था, जिसने कई लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या बिहार में महागठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक चल रहा है।

राजनीतिक विश्लेषक इसे तेजस्वी के एक सोचे-समझे कदम के रूप में देख रहे हैं। बिहार में जहां जातीय और धार्मिक समीकरण काफी संवेदनशील होते हैं, वहां बीफ जैसे मुद्दे पर किसी भी तरह की टिप्पणी राजनीतिक नुकसान पहुंचा सकती है। तेजस्वी शायद अपनी पार्टी को ऐसे विवादों से बचाना चाहते हैं, खासकर तब जब वे खुद को एक जिम्मेदार और समावेशी नेता के तौर पर पेश कर रहे हैं।

यह दिखाता है कि भले ही कांग्रेस और आरजेडी राष्ट्रीय स्तर पर एक साथ हों, लेकिन राज्य स्तर पर वे अपनी रणनीतियों और छवि को लेकर काफी सतर्क रहते हैं। तेजस्वी का यह कदम आरजेडी को एक अलग पहचान देने और उसे अनावश्यक विवादों से दूर रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस बयान का बिहार की राजनीति और महागठबंधन पर क्या असर पड़ता है।

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