
Breaking Today, Digital Desk : क्या आपने कभी सोचा है कि एक 10वीं पास लड़का Infosys जैसी बड़ी कंपनी में सिर्फ ऑफिस बॉय का काम करते-करते, एक दिन अपनी करोड़ों की कंपनी का मालिक बन सकता है? सुनने में थोड़ा फिल्मी लगता है, लेकिन ये किसी कहानी से कम नहीं है दादाराव भगत की ज़िंदगी की सच्चाई।
आज दादाराव भगत ‘Doographics’ नाम की एक कमाल की कंपनी के CEO हैं। ये कंपनी बिल्कुल ‘Canva’ की तरह काम करती है, जहाँ आप आसानी से डिज़ाइन बना सकते हैं। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि डिग्री से ज़्यादा अगर कुछ मायने रखता है, तो वो है आपका जुनून और कुछ कर दिखाने की इच्छा।
दादाराव महाराष्ट्र के एक छोटे से गाँव से आते हैं। घर की हालत ऐसी थी कि 10वीं के बाद आगे पढ़ाई करने के पैसे नहीं थे। मजबूरी में उन्हें काम ढूंढना पड़ा। मुंबई में एक रिश्तेदार की मदद से उन्हें Infosys में ऑफिस बॉय की नौकरी मिली।
अब आप सोचेंगे, इसमें खास क्या है? खास ये है कि दादाराव सिर्फ चाय-पानी पिलाने या फाइलें इधर-उधर करने वाले ऑफिस बॉय नहीं थे। वो Infosys के बड़े-बड़े अधिकारियों को देखते थे, उनकी बातें सुनते थे, और ये सब उन्हें अंदर से कुछ बड़ा करने की प्रेरणा देता था। उन्होंने वहीं से टेक्नोलॉजी और बिज़नेस को समझना शुरू किया। उन्हें लगा कि अगर ये लोग कर सकते हैं, तो मैं क्यों नहीं?
यहीं से उनके दिमाग में ‘Doographics’ का आइडिया आया। उन्होंने देखा कि छोटे बिज़नेस और आम लोगों को अच्छे डिज़ाइन बनाने में कितनी दिक्कत आती है। अगर कोई ऐसा प्लेटफॉर्म हो, जहाँ बिना किसी खास ट्रेनिंग के भी लोग खुद ही शानदार डिज़ाइन बना सकें, तो कितना अच्छा होगा!
और बस, उन्होंने ठान ली। नौकरी करते-करते ही उन्होंने अपने आइडिया पर काम करना शुरू किया। कई रातें जागकर बिताईं, खूब मेहनत की, और धीरे-धीरे ‘Doographics’ को एक रूप दिया। आज उनकी कंपनी लाखों लोगों को डिज़ाइन बनाने में मदद कर रही है और खुद दादाराव भगत एक प्रेरणा बन गए हैं।
उनकी कहानी ये बताती है कि अगर आपके सपने बड़े हैं और आप उन्हें पूरा करने के लिए जी-जान लगा देते हैं, तो कोई भी रुकावट आपको रोक नहीं सकती। न गरीबी, न कम पढ़ाई, न कोई और मजबूरी। बस इरादा पक्का होना चाहिए!






