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ट्रंप का भारत को लेकर बड़ा दांव, वफादार सर्जियो गोर बने नए राजदूत, मोदी सरकार के लिए क्या हैं इसके मायने…

Trump's big bet on India, loyalist Sergio Gor becomes the new ambassador, what does this mean for the Modi government...

Breaking Today, Digital Desk : अमेरिका और भारत के बीच तनावपूर्ण संबंधों के दौर में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एक सबसे भरोसेमंद और वफादार सहयोगी, सर्जियो गोर को भारत में अगले अमेरिकी राजदूत के रूप में नामित किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच व्यापार शुल्कों (टैरिफ) और भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद जैसे मुद्दों पर मतभेद चरम पर हैं। गोर की नियुक्ति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक सीधे संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन यह संदेश दोस्ती का है या दबाव का, इसे लेकर विशेषज्ञ बंटे हुए हैं।

कौन हैं ट्रंप के वफादार सर्जियो गोर?

सर्जियो गोर (38) वर्तमान में व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति के कार्मिक कार्यालय (Presidential Personnel Office) के प्रमुख हैं। इस भूमिका में, वे ट्रंप प्रशासन में की जाने वाली सभी नियुक्तियों की वफादारी की जांच करने के लिए जाने जाते हैं। उनका मुख्य काम यह सुनिश्चित करना रहा है कि संघीय सरकार में केवल “अमेरिका फर्स्ट पैट्रियट्स” की ही भर्ती हो।

उज़्बेकिस्तान में जन्मे गोर, ट्रंप के बेहद करीबी माने जाते हैं और उन्होंने राष्ट्रपति के बड़े बेटे, डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के साथ मिलकर एक प्रकाशन कंपनी की भी स्थापना की है। हालांकि, उनका नाम विवादों में भी रहा है, जब टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने उन्हें “सांप” (snake) कहा था। यह विवाद नासा के प्रशासक पद पर एक नियुक्ति को लेकर हुआ था, जिसे गोर ने कथित तौर पर रुकवा दिया था।

नियुक्ति का समय और संदेश

यह नियुक्ति भारत-अमेरिका संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हुई है। दोनों नेताओं, ट्रंप और मोदी के बीच जो गर्मजोशी पहले देखी गई थी, उसमें हाल के महीनों में कमी आई है। ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामानों पर 50% तक टैरिफ लगा दिया है, और भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने के उनके दावों ने भी नई दिल्ली को असहज किया है।

ऐसे में अपने सबसे करीबी व्यक्ति को दिल्ली भेजना यह दर्शाता है कि ट्रंप भारत के साथ संबंधों को सीधे तौर पर नियंत्रित करना चाहते हैं। एक विशेषज्ञ के अनुसार, “राष्ट्रपति मोदी सरकार को एक शक्तिशाली संकेत भेज रहे हैं कि वे एक ऐसे दूत को भेज रहे हैं जो व्यक्तिगत रूप से उनके बहुत करीब है।” इसका मतलब यह हो सकता है कि अब जो भी बातचीत होगी, उसमें सीधा संदेश राष्ट्रपति ट्रंप का होगा।

दोहरी भूमिका पर चिंता

गोर की नियुक्ति में एक और असामान्य बात है। उन्हें भारत में राजदूत के साथ-साथ दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के लिए विशेष दूत की भूमिका भी दी गई है। यह पहली बार है कि किसी अमेरिकी राजदूत को यह दोहरी जिम्मेदारी दी गई है, जिसने भारत में चिंता पैदा कर दी है। इस कदम को भारत-पाकिस्तान के मसले पर अमेरिका के पुराने “हाइफनेशन” (दोनों देशों को एक साथ जोड़कर देखना) की वापसी के तौर पर देखा जा रहा है। भारत हमेशा से पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह की तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का विरोध करता रहा है।

ट्रंप के पूर्व रणनीतिकार स्टीव बैनन जैसे समर्थकों का मानना है कि गोर एक बेहतरीन चयन हैं क्योंकि उनकी राष्ट्रपति तक सीधी पहुंच है, जो किसी भी मुद्दे को सुलझाने में मददगार साबित हो सकती है। वहीं, कुछ आलोचकों का मानना है कि गोर को भारतीय नीतिगत मुद्दों की गहरी समझ नहीं है और उनका मुख्य एजेंडा ट्रंप के आदेशों को लागू करना होगा, चाहे वह भारत के हित में हो या नहीं।

यह देखना होगा कि सर्जियो गोर का दिल्ली आना दोनों देशों के बीच के तनाव को कम करता है या फिर ट्रंप के अमेरिका फर्स्ट” एजेंडे को आगे बढ़ाने का एक और जरिया बनता है।

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