
Breaking Today, Digital Desk : देश की राजधानी दिल्ली के एक स्टार्टअप में उस वक्त अफरातफरी का माहौल बन गया, जब एक नए कर्मचारी ने दोपहर के भोजन से पहले ही नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया। منابع के अनुसार, कर्मचारी ने मानव संसाधन (एचआर) विभाग को अपने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि वह इस माहौल में काम नहीं कर सकता। यह घटना स्टार्टअप जगत में काम के बढ़ते दबाव और अपेक्षाओं पर एक बार फिर से गंभीर सवाल खड़े करती है।
असहज कर देने वाला था माहौल
नाम न छापने की शर्त पर कंपनी के एक सूत्र ने बताया कि सुबह जब नया कर्मचारी दफ्तर पहुंचा तो उसे सब कुछ सामान्य लगा। लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, दफ्तर का माहौल उसके लिए असहज होता गया। बताया जा रहा है कि काम को लेकर एक तरह की आपाधापी थी और कर्मचारियों पर बेहतर प्रदर्शन करने का भारी दबाव साफ नजर आ रहा था।
लंच से पहले ही मोहभंग
लंच का समय होने से ठीक पहले, कर्मचारी ने एचआर से संपर्क किया और कहा कि वह इस तरह के तनावपूर्ण माहौल में काम करने में असमर्थ है। उसने तुरंत प्रभाव से अपना त्यागपत्र सौंप दिया। कर्मचारी के इस अप्रत्याशित कदम से एचआर समेत दफ्तर के बाकी लोग भी हैरान रह गए। यह घटना इस बात की ओर भी इशारा करती है कि आज के युवा पेशेवर काम करने की जगह पर एक सकारात्मक और सहयोगी माहौल को कितना महत्व देते हैं।
स्टार्टअप कल्चर पर उठे सवाल
यह कोई पहली बार नहीं है जब किसी स्टार्टअप का वर्क कल्चर सवालों के घेरे में आया हो। अक्सर देखा गया है कि तेजी से आगे बढ़ने की होड़ में स्टार्टअप्स में कर्मचारियों के काम के घंटे बढ़ जाते हैं और उन पर उनकी क्षमता से अधिक काम का बोझ डाल दिया जाता है। इस घटना ने एक बार फिर इस बहस को छेड़ दिया है कि क्या स्टार्टअप्स को अपने कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को प्राथमिकता नहीं देनी चाहिए? यह मामला उन सभी नई कंपनियों के लिए एक चेतावनी है जो सिर्फ विकास के आंकड़ों पर ध्यान देती हैं, लेकिन अपने कर्मचारियों की मानवीय जरूरतों को नजरअंदाज कर देती हैं।






