
Breaking Today, Digital Desk : अभिनेता से नेता बने कमल हासन के “सनातन धर्म” पर दिए एक बयान ने तमिलनाडु से लेकर दिल्ली तक की सियासत में हलचल मचा दी है। एक चैरिटी कार्यक्रम में शिक्षा को तानाशाही और सनातन की जंजीरों को तोड़ने वाला हथियार बताने पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी ने हासन की टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए लोगों से उनकी फिल्मों का बहिष्कार करने की अपील की है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब कमल हासन, अभिनेता सूर्या द्वारा संचालित अगरम फाउंडेशन के एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (NEET) का विरोध करते हुए कहा कि शिक्षा ही वह एकमात्र शक्ति है जो तानाशाही और सनातन जैसी विचारधाराओं की बेड़ियों को तोड़ सकती है। उनके इस बयान के बाद तमिलनाडु बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
बीजेपी के प्रदेश सचिव अमर प्रसाद रेड्डी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर कहा, “पहले उदयनिधि स्टालिन थे, अब कमल हासन हैं जो सनातन धर्म को नष्ट करना चाहते हैं। आइए हम उन्हें सबक सिखाएं।” उन्होंने आगे सभी हिंदुओं से कमल हासन की फिल्मों को न देखने की अपील की, ताकि भविष्य में कोई भी सार्वजनिक मंच पर करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने वाले ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयान न दे सके।
बीजेपी प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने भी कमल हासन पर हमला बोलते हुए उन पर “पैसे और सत्ता के नशे में चूर” होने और अपनी “सनातन जड़ों” को भूलने का आरोप लगाया। उन्होंने हासन से अपने बयान के लिए माफी की मांग की है। यह विवाद 2023 में उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म को खत्म करने वाले बयान की याद दिलाता है, जिसकी भी भारी आलोचना हुई थी।
वहीं, तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) कमल हासन के समर्थन में उतर आई है। डीएमके के एक प्रवक्ता ने कहा कि कमल हासन ने बिल्कुल सही मुद्दे पर चोट की है और दक्षिणपंथी ताकतें इस बात से बौखलाई हुई हैं। गौरतलब है कि द्रविड़ विचारधारा ऐतिहासिक रूप से सनातन धर्म को जाति-आधारित भेदभाव को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था के रूप में देखती आई है। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर देश में ‘सनातन धर्म’, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक विचारधाराओं के टकराव की बहस को जन्म दे दिया है।






