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नवरात्रि के छठे दिन का रहस्य, माँ कात्यायनी कैसे बदलेंगी आपकी किस्मत…

The secret of the sixth day of Navratri, how will Maa Katyayani change your destiny...

Breaking Today, Digital Desk : नवरात्रि का छठा दिन माँ कात्यायनी को समर्पित है। यह दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि माँ कात्यायनी शक्ति और साहस का प्रतीक हैं। आइए जानते हैं इस दिन की पूजा विधि, कथा और भोग के बारे में।

माँ कात्यायनी का स्वरूप और महत्व
माँ कात्यायनी का रूप अत्यंत भव्य और मनमोहक है। वह शेर पर सवार होती हैं और उनके चार हाथ हैं। एक हाथ में कमल, दूसरे में तलवार, तीसरा अभय मुद्रा में और चौथा वरद मुद्रा में होता है। ऐसी मान्यता है कि माँ कात्यायनी की पूजा करने से विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। वह भक्तों को भय से मुक्ति दिलाती हैं और शत्रु बाधाओं का नाश करती हैं।

पूजा विधि
नवरात्रि के छठे दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें और माँ कात्यायनी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

  1. संकल्प: पूजा शुरू करने से पहले हाथ में जल और चावल लेकर व्रत का संकल्प लें।

  2. ध्यान: माँ कात्यायनी का ध्यान करें और उनके मंत्रों का जाप करें। सबसे प्रसिद्ध मंत्र है: “ॐ देवी कात्यायन्यै नमः।”

  3. पूजा सामग्री: माँ को पीले वस्त्र, पीले फूल (जैसे गेंदा या गुलाब), सिंदूर, कुमकुम, अक्षत, धूप, दीप, और नैवेद्य (भोग) अर्पित करें।

  4. आरती: पूजा के अंत में माँ कात्यायनी की आरती करें और उनसे अपनी मनोकामनाएं पूरी करने की प्रार्थना करें।

माँ कात्यायनी की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने माँ दुर्गा को अपनी पुत्री के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माँ दुर्गा ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया, इसलिए उन्हें कात्यायनी कहा गया।

जब महिषासुर नामक राक्षस का अत्याचार बहुत बढ़ गया था, तब ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों देवताओं ने अपने तेज से माँ कात्यायनी को उत्पन्न किया। माँ कात्यायनी ने महिषासुर का वध कर देवताओं और संसार को उसके आतंक से मुक्त कराया। इसलिए उन्हें महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता है।

भोग
माँ कात्यायनी को शहद का भोग अत्यंत प्रिय है। छठे दिन उन्हें शुद्ध शहद या शहद से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए। यह माना जाता है कि ऐसा करने से माँ प्रसन्न होती हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

नवरात्रि के छठे दिन का रंग: पीला
छठे दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। पीला रंग उत्साह, खुशी और सकारात्मकता का प्रतीक है।

यह दिन माँ कात्यायनी की भक्ति और आराधना का है। सच्चे मन से की गई पूजा निश्चित रूप से शुभ फल प्रदान करती है।

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