हाईकोर्ट ने सरकार और LDA को लगाई फटकार, पूछाअब तक क्यों चुप…
The High Court reprimanded the government and LDA, asked why they were silent till now

Breaking Today, Digital Desk : इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राजधानी स्थित सेना की फायरिंग रेंज की जमीन पर बड़े पैमाने पर हुए अवैध कब्जों और निर्माणों पर गहरी नाराजगी जताई है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इस गंभीर मुद्दे पर सरकार और लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की निष्क्रियता को लेकर तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि जब फायरिंग रेंज जैसी महत्वपूर्ण भूमि पर अवैध कब्जा हो रहा था, तो सरकार और एलडीए ने अपनी आंखें और कान क्यों बंद रखे थे।
यह मामला एक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल द्वारा 2012 में दायर एक जनहित याचिका से संबंधित है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि फायरिंग रेंज की जमीन पर अवैध रूप से निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने पाया कि न केवल निजी बिल्डरों ने, बल्कि कुछ मामलों में सरकारी एजेंसियों ने भी नियमों को ताक पर रखकर निर्माण की अनुमति दी।
कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में इस स्थिति को “अप्रिय” बताया और कहा कि यह दर्शाता है कि संबंधित अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में घोर लापरवाही बरती है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि शहरी क्षेत्रों में सुनियोजित विकास सुनिश्चित करना और अवैध निर्माणों पर नजर रखना राज्य सरकार और उसकी एजेंसियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
इस मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि सेना ने अदालत को बताया कि इन अवैध बसावटों के कारण फायरिंग रेंज में सैन्य अभ्यास करने में गंभीर बाधाएं आ रही हैं। इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक संभावित खतरे के रूप में देखा जा रहा है।
हाईकोर्ट ने एलडीए को कड़ी फटकार लगाते हुए यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि इतने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण उनकी जानकारी के बिना कैसे हो गए। साथ ही, अदालत ने राज्य सरकार को भविष्य में इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित करने का भी आदेश दिया है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि संतोषजनक जवाब दाखिल नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। इस पूरे प्रकरण ने लखनऊ में भूमि प्रबंधन और शहरी नियोजन में व्याप्त खामियों को उजागर कर दिया है, जिस पर अब न्यायपालिका की पैनी नजर है।






