तुर्की भूकंप गूगल की चेतावनी प्रणाली लाखों लोगों की जान बचाने में कैसे नाकाम रही…
Türkiye earthquake How Google's warning system failed to save millions of lives

Breaking Today, Digital Desk : टेक्नोलॉजी की दुनिया की दिग्गज कंपनी गूगल ने यह स्वीकार किया है कि उसकी भूकंप चेतावनी प्रणाली फरवरी 2023 में तुर्की में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान लाखों लोगों को समय पर सचेत करने में विफल रही. इस विनाशकारी भूकंप में 55,000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और एक लाख से ज़्यादा लोग घायल हुए थे.
गूगल की एंड्रॉयड अर्थक्वेक अलर्ट्स (AEA) प्रणाली, जो भूकंप की स्थिति में लोगों को चेतावनी देने के लिए बनाई गई है, उस समय सक्रिय थी हालांकि, यह प्रणाली भूकंप की भयावहता का सही अंदाज़ा लगाने में नाकाम रही. भूकंप के केंद्र के 98 मील के दायरे में लगभग 10 मिलियन लोग रहते थे, लेकिन गूगल की सबसे महत्वपूर्ण “टेक एक्शन” चेतावनी केवल 469 लोगों को ही मिली. यह चेतावनी सबसे गंभीर खतरों के लिए होती है और फोन की ‘डू नॉट डिस्टर्ब’ जैसी सेटिंग्स को भी बायपास कर देती है.
इसके बजाय, लगभग पांच लाख उपयोगकर्ताओं को एक निचले स्तर का “बी अवेयर” अलर्ट भेजा गया था, जो हल्के झटकों के लिए होता है. यह अलर्ट सुबह 4:17 बजे आए पहले भूकंप के समय ज़्यादातर लोगों के लिए प्रभावहीन साबित हुआ, क्योंकि उस समय लोग सो रहे थे और यह अलर्ट उनके फोन की साइलेंट सेटिंग्स को ओवरराइड नहीं कर सका.
बीबीसी की महीनों की रिपोर्टिंग में भूकंप क्षेत्र में एक भी ऐसा उपयोगकर्ता नहीं मिला जिसे पहले झटके से पहले गंभीर चेतावनी मिली हो. गूगल ने बाद में ‘साइंस’ पत्रिका में एक अध्ययन प्रकाशित किया, जिसमें “डिटेक्शन एल्गोरिदम की सीमाओं” को स्वीकार किया गया. कंपनी के शोधकर्ताओं ने बताया कि सिस्टम ने पहले भूकंप की तीव्रता को मोमेंट मैग्नीट्यूड स्केल पर 4.5 से 4.9 के बीच आंका था, जबकि असल में यह 7.8 थी.
कुछ घंटों बाद आए दूसरे बड़े झटके के दौरान भी प्रणाली का प्रदर्शन कमज़ोर रहा. इस बार 8,158 “टेक एक्शन” अलर्ट और लगभग चार मिलियन “बी अवेयर” चेतावनियाँ जारी की गईं, जो भूकंप की गंभीरता को देखते हुए भी अपर्याप्त थीं.
गूगल के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया, “हम हर भूकंप से जो सीखते हैं, उसके आधार पर हम सिस्टम में लगातार सुधार कर रहे हैं.” इस घटना ने गूगल की चेतावनी प्रणाली पर अति-निर्भरता और इसके प्रदर्शन के पारदर्शी मूल्यांकन की आवश्यकता पर गंभीर चिंताएँ पैदा की हैं.




