जब सालों बाद अपने स्कूल पहुंचे अंतरिक्षयात्री शुभांशु शुक्ला, शिक्षकों को देख बोले- ‘कभी इनसे डरता…
When astronaut Shubhanshu Shukla reached his school after years, he said on seeing the teachers- 'I was never afraid of them...

Breaking Today, Digital Desk : आंखों में तारों की चमक और दिल में स्कूल की पुरानी यादें लिए, भारत के गौरव, अंतरिक्षयात्री शुभांशु शुक्ला जब सालों बाद अपने स्कूल की दहलीज पर पहुंचे तो माहौल भावनाओं से सराबोर हो गया। सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, अलीगंज के गलियारे एक बार फिर अपने उस पुराने छात्र के कदमों से गुलजार हो उठे, जिसने आज आसमान की बुलंदियों को छू लिया है। चेहरे पर मुस्कान और अपनेपन का भाव लिए शुभांशु ने कहा, “ऐसा लग रहा है, जैसे घर लौट आया हूं।”
यह मौका सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं था, बल्कि यादों की एक भावुक यात्रा थी। अपनी पत्नी कामना और बेटे कियाश के साथ स्कूल पहुंचे शुभांशु के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा था। बूंदाबांदी के बीच जब वे स्कूल के परिचित गलियारों से गुजरे, তো उनकी आंखों में छात्र जीवन की अनगिनत शरारतें और सुनहरे पल तैर गए। उन्होंने उन क्लासरूम को देखा जहां कभी बैठकर उन्होंने भविष्य के सपने बुने थे।
छात्रों, शिक्षकों और स्कूल के कर्मचारियों से बातचीत के दौरान माहौल उस समय खुशनुमा हो गया जब शुभांशु ने हंसते हुए कहा, “जिन शिक्षकों के सामने जाने से मैं कभी डरता था, आज उन्हें देखकर बहुत अच्छा लग रहा है। वाकई, समय कितना बदल गया है।” उनकी इस बात पर उनके पुराने शिक्षक मुस्कुरा दिए और पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यह एक ऐसा पल था जिसमें एक कामयाब छात्र और उसके गुरुओं के बीच का अनमोल रिश्ता साफ झलक रहा था।
अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के अपने ऐतिहासिक मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करके लौटे ग्रुप कैप्टन शुभांशु ने बच्चों के साथ अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे शून्य गुरुत्वाकर्षण में शरीर को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। बच्चों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा, “सफलता के लिए सिर्फ दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। भविष्य बेहद उज्ज्वल है और आप सभी के लिए अवसर इंतजार कर रहे हैं।” उन्होंने 2040 तक भारत के चंद्रमा पर मानव भेजने के महत्वाकांक्षी मिशन का भी जिक्र किया और कहा कि इसे साकार करने की जिम्मेदारी आज के युवाओं पर है।
शुभांशु शुक्ला, राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष जाने वाले दूसरे भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचने वाले पहले भारतीय नागरिक हैं। ‘एक्सिओम-चार’ मिशन के तहत उन्होंने 18 दिन अंतरिक्ष में बिताए और कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम दिया। उनकी यह यात्रा न केवल भारत के लिए बल्कि उत्तर प्रदेश के लिए भी एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, क्योंकि वे इस राज्य से ऐसे मिशन का हिस्सा बनने वाले पहले व्यक्ति हैं। इसी को सम्मान देते हुए योगी सरकार ने उनके नाम पर अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए एक स्कॉलरशिप शुरू करने की घोषणा की है।
अपने पुराने स्कूल में शुभांशु की यह वापसी सिर्फ एक अंतरिक्षयात्री की घर वापसी नहीं थी, बल्कि यह सपनों की उड़ान, कड़ी मेहनत और उस जमीन से जुड़ाव की एक खूबसूरत कहानी थी जहां से उन्होंने अपने सफर की शुरुआत की थी।






