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दशहरा, राजनीति और एक नाम, मैसूर में क्यों मचा है हंगामा…

Dussehra, politics and one name, why is there a ruckus in Mysore

Breaking Today, Digital Desk : इस बार मैसूर दशहरा के उद्घाटन को लेकर एक नई चर्चा शुरू हो गई है। जब जानी-मानी प्रोफेसर बानू मुश्ताक ने इस भव्य उत्सव का उद्घाटन किया, तो कुछ लोगों ने सवाल उठाए, तो कुछ ने इसका स्वागत किया। मुख्य रूप से, बीजेपी ने इस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है, लेकिन उनके सहयोगी दल, जेडीएस ने साफ कर दिया है कि उन्हें इसमें कोई समस्या नहीं दिखती।

दरअसल, मैसूर दशहरा कर्नाटक का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्व है, जिसे बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। हर साल, किसी खास शख्सियत को इसका उद्घाटन करने के लिए आमंत्रित किया जाता है। इस बार यह मौका प्रोफेसर बानू मुश्ताक को मिला। उनका चयन होते ही, कुछ हलकों में इस पर तीखी प्रतिक्रियाएँ आने लगीं। बीजेपी का कहना है कि यह फैसला सही नहीं था और इसके पीछे कुछ और कारण हो सकते हैं।

हालांकि, जेडीएस ने इस मामले पर एक अलग ही रुख अपनाया है। उनका कहना है कि प्रोफेसर बानू मुश्ताक एक सम्मानित शिक्षाविद् हैं और उनके उद्घाटन करने में कोई बुराई नहीं है। जेडीएस के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे इस तरह के विवादों को बढ़ावा नहीं देना चाहते और दशहरा सभी समुदायों का त्योहार है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बहस आगे चलकर क्या मोड़ लेती है। लेकिन एक बात तो तय है, मैसूर दशहरा ने इस बार अपने साथ एक नई राजनीतिक चर्चा को भी जन्म दे दिया है।

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