
Breaking Today, Digital Desk : राजस्थान के अलवर में एक 8 साल के बच्चे की गवाही ने रिश्तों, विश्वास और इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। उसकी आँखों ने वो भयानक सच देखा, जिसे छुपाने के लिए उसकी ही माँ ने उसके पिता को मौत के घाट उतार दिया। बच्चे के एक खुलासे ने इस पूरी खौफनाक साजिश की परतें खोलकर रख दीं, जिसकी कहानी सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए।
यह दिल दहला देने वाली घटना खैरथल-तिजारा जिले की है, जहां एक घर की छत से जब पड़ोसियों को असहनीय बदबू आने लगी तो पुलिस को बुलाया गया। छत पर एक नीले रंग का प्लास्टिक का ड्रम रखा था, जिसे खोलते ही सबके होश उड़ गए। अंदर एक आदमी की लाश थी, जिसे गला घोंटकर मारा गया था और पहचान मिटाने के लिए नमक से ढका गया था। मृतक की पहचान हंसराज के रूप में हुई, जो अपनी पत्नी सुनीता और तीन बच्चों के साथ उस घर में किराए पर रहता था।
घर से हंसराज की पत्नी सुनीता और बच्चे गायब थे, जिससे पहला शक उसी पर गया। पुलिस ने जब जांच शुरू की तो कड़ी से कड़ी जुड़ती गई और आखिरकार सुनीता को उसके प्रेमी जितेंद्र शर्मा के साथ एक ईंट-भट्ठे से गिरफ्तार कर लिया गया, जहां वे बच्चों को लेकर छिपे हुए थे।
इस हत्याकांड का सबसे अहम और दर्दनाक पहलू हंसराज का 8 वर्षीय बेटा है, जो इस पूरी हैवानियत का चश्मदीद गवाह बना। उसने पुलिस को जो बताया वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। बच्चे के अनुसार, घटना की रात उसके पिता हंसराज, माँ सुनीता और उनका प्रेमी जितेंद्र एक साथ शराब पी रहे थे। इसके बाद पिता और माँ के बीच झगड़ा हुआ। बच्चे ने बताया कि उसके पिता अक्सर माँ के साथ मारपीट करते थे।
उसने बताया, “झगड़े के बाद अंकल (जितेंद्र) ने पापा पर हमला कर दिया और तकिये से उनका मुंह दबा दिया, जबकि मम्मी ने पापा के पैर पकड़ रखे थे”। इस खौफनाक मंजर के बाद बच्चे को सोने के लिए भेज दिया गया। जब वह अगली सुबह उठा, तो उसने अपने पिता को बिस्तर पर बेसुध पड़ा देखा और माँ और जितेंद्र को उनके पास खड़े पाया। उसकी मासूम आँखों ने देखा कि कैसे उन दोनों ने पानी से भरे एक ड्रम को खाली किया, उसके पिता के शव को उसमें डाला और छत पर ले जाकर छिपा दिया।
पुलिस के अनुसार, सुनीता और जितेंद्र के बीच प्रेम संबंध था, जिसकी भनक हंसराज को लग गई थी और यही बात घर में होने वाले रोज-रोज के झगड़ों की वजह थी। पति को रास्ते से हटाने के लिए ही इस पूरी हत्या की साजिश रची गई। फिलहाल, दोनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं और बच्चों को सुरक्षा के लिए उनके दादा-दादी को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है। यह घटना न केवल एक अपराध है, बल्कि यह उस मासूम बच्चे के मन पर पड़े उस गहरे जख्म की कहानी भी है, जिसे शायद ही कोई भर पाए।






