
Breaking Today, Digital Desk : पश्चिम बंगाल की राजनीति में हमेशा से कुछ न कुछ हलचल मची रहती है, और अभी से ही 2026 के विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। बीजेपी के अंदरखाने से जो खबरें आ रही हैं, वो काफी दिलचस्प हैं। सुनने में आ रहा है कि पार्टी इस बार ‘नो रिपीट’ का फॉर्मूला अपनाने वाली है, ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने उत्तर प्रदेश में किया था। इसका मतलब है कि एक तिहाई से ज्यादा मौजूदा विधायकों को शायद अगले चुनाव में टिकट न मिले।
ये अपने आप में एक बड़ा फैसला होगा। अगर ऐसा होता है तो करीब 77 में से 25 से 30 विधायकों की सीट पर खतरा मंडरा रहा है। आखिर ऐसा क्यों? दरअसल, बीजेपी आलाकमान को लगता है कि कुछ विधायकों का प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं रहा है, जितना उम्मीद की गई थी। जनता के बीच उनकी छवि, स्थानीय स्तर पर पकड़ और पार्टी के लिए उनकी मेहनत को परखा जा रहा है।
पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने एक बड़ा दाँव खेला था, लेकिन सत्ता तक नहीं पहुँच पाई। अब वे कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। पार्टी का मानना है कि नए चेहरों को मौका देने से जनता में एक नया संदेश जाएगा और शायद ‘एंटी-इनकंबेंसी’ का असर कम हो। इसके अलावा, नए और युवा नेताओं को आगे लाने की भी रणनीति हो सकती है, जो पार्टी के भविष्य के लिए अहम है।
हालांकि, यह आसान नहीं होगा। जो विधायक अभी हैं, वे अपनी सीट बचाने के लिए पूरा जोर लगाएंगे। ऐसे में पार्टी के अंदर थोड़ी बहुत खींचतान तो देखने को मिलेगी। लेकिन, बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व इस पर काफी गंभीरता से विचार कर रहा है। उनका मकसद सिर्फ चुनाव जीतना नहीं, बल्कि बंगाल में अपनी जड़ें और मजबूत करना भी है। आने वाले समय में देखना होगा कि यह रणनीति कितनी सफल होती है और बंगाल की राजनीति में क्या नए रंग दिखाती है।






