
Breaking Today, Digital Desk : हाल ही में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सचिव देवाजीत सैकिया के एक बयान ने खेल जगत में हलचल मचा दी है। उनका कहना था कि भारत ऐसे किसी देश से ट्रॉफी स्वीकार नहीं कर सकता जो भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ रहा हो। यह बयान उस घटना के संदर्भ में आया है जब BCCI ने कथित तौर पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी से एक ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था।
यह सिर्फ एक ट्रॉफी लेने या न लेने का मामला नहीं है, बल्कि यह देश के सम्मान और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बन जाता है। जब दो देशों के बीच रिश्ते तनावपूर्ण हों, खासकर जब एक देश दूसरे के खिलाफ लगातार शत्रुतापूर्ण गतिविधियाँ कर रहा हो, तो ऐसे में खेल के माध्यम से भी कोई ऐसा संकेत देना जिससे लगे कि सब कुछ सामान्य है, शायद सही नहीं होता।
भारतीय क्रिकेट हमेशा से खेल भावना और सम्मान को महत्व देता आया है। लेकिन, जब बात देश की संप्रभुता और सुरक्षा की आती है, तो ये प्राथमिकताएँ बदल जाती हैं। देवाजीत सैकिया का बयान स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि BCCI देश के हितों को सर्वोपरि रखता है।
कुछ लोगों का तर्क हो सकता है कि खेल को राजनीति से दूर रखना चाहिए। लेकिन, यह समझना भी ज़रूरी है कि खेल सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है; यह दो देशों के बीच संबंधों को प्रतिबिंबित भी करता है। जब पड़ोसी देश लगातार सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा हो, तो ऐसे में उनसे किसी भी तरह का ‘सामान्य’ जुड़ाव दिखाना भारत के नागरिकों की भावनाओं को ठेस पहुँचा सकता है।
BCCI का यह कदम शायद यह संदेश देने की एक कोशिश है कि भारत अपने मूल्यों और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा, भले ही वह क्रिकेट के मैदान पर ही क्यों न हो। यह घटना निश्चित रूप से दोनों देशों के क्रिकेट संबंधों पर एक और छाया डालती है और भविष्य में ऐसे और फैसलों की उम्मीद की जा सकती है।






