
Breaking Today, Digital Desk : दशहरे के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपने सालाना भाषण में कई अहम मुद्दों पर बात की। उन्होंने अमेरिका की तरफ से भारत को लेकर दिए गए बयानों से लेकर देश में बढ़ती अराजकता पर खुलकर अपनी राय रखी। उनका यह भाषण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें उन्होंने ‘भारत पहले’ के सिद्धांत पर जोर दिया।
अमेरिका की चुभन और भारत का जवाब
हाल ही में अमेरिका ने भारत में मानवाधिकारों और अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता जताई थी। मोहन भागवत ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत को किसी और देश से प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है। उन्होंने साफ किया कि भारत अपने आंतरिक मामलों को सुलझाने में सक्षम है और किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने देश की संप्रभुता और आत्मसम्मान पर जोर दिया, जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।
बढ़ती अराजकता पर चेतावनी
मोहन भागवत ने देश में बढ़ती अराजकता, सामाजिक विभाजन और हिंसा की घटनाओं पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे सद्भाव बनाए रखें और समाज में शांति स्थापित करने में अपना योगदान दें। भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि देश को तोड़ने वाली ताकतों से सावधान रहने की जरूरत है और सभी को मिलकर देश के विकास के लिए काम करना चाहिए।
जनसंख्या नियंत्रण और समान नागरिक संहिता
भागवत ने अपने भाषण में जनसंख्या नियंत्रण और समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि जनसंख्या असंतुलन देश के लिए एक गंभीर चुनौती है और इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने समान नागरिक संहिता को लेकर भी बहस छेड़ी और कहा कि यह देश की एकता के लिए जरूरी है।
महिलाओं की भूमिका और आत्मनिर्भर भारत
मोहन भागवत ने महिलाओं की समाज में बढ़ती भूमिका की सराहना की और उन्हें और सशक्त बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और उन्हें पूरा सम्मान मिलना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश को आर्थिक रूप से मजबूत होना होगा ताकि वह किसी पर निर्भर न रहे।
कुल मिलाकर, मोहन भागवत का दशहरे का भाषण देश की मौजूदा स्थिति और भविष्य की चुनौतियों पर एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। इसमें उन्होंने ‘भारत पहले’ के सिद्धांत को प्रमुखता दी और देश के सामने मौजूद विभिन्न मुद्दों पर खुलकर बात की।






