इंटरव्यू में गीता का ज्ञान, क्या सही था इस HR का फैसला…
Geeta's knowledge in the interview, was this HR's decision right...

Breaking Today, Digital Desk : हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसी घटना वायरल हो गई है, जिसने लोगों को हैरान कर दिया है। एक महिला HR मैनेजर ने एक बहुत ही काबिल उम्मीदवार को नौकरी देने से मना कर दिया और अपने इस फैसले को सही ठहराने के लिए उसने भगवद गीता के एक श्लोक का सहारा लिया। यह बात सामने आने के बाद से इंटरनेट पर एक नई बहस छिड़ गई है कि क्या HR को ऐसे धार्मिक ग्रंथों का इस्तेमाल अपने प्रोफेशनल फैसलों में करना चाहिए?
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, एक यूजर ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें उसने बताया कि उसकी दोस्त एक बड़ी कंपनी में इंटरव्यू देने गई थी। इंटरव्यू के बाद HR मैनेजर ने उसकी दोस्त को यह कहकर रिजेक्ट कर दिया कि वह ‘कर्मयोगी’ नहीं है। HR ने अपने इस फैसले को स्पष्ट करने के लिए भगवद गीता के अध्याय 2, श्लोक 47 का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है, “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।” इसका मतलब है कि इंसान को सिर्फ कर्म करने का अधिकार है, फल की चिंता नहीं करनी चाहिए।
HR मैनेजर का तर्क था कि उम्मीदवार को सिर्फ नौकरी पाने के लिए इंटरव्यू नहीं देना चाहिए, बल्कि उसे अपने काम से प्यार होना चाहिए और उसे फल की चिंता किए बिना अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहिए। उसने कहा कि उम्मीदवार के जवाबों में उसे ‘कर्मयोगी’ वाली भावना नहीं दिखी।
लोगों की प्रतिक्रियाएं
यह घटना सामने आने के बाद से सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ लोग HR मैनेजर के इस फैसले को सही ठहरा रहे हैं और कह रहे हैं कि काम के प्रति सच्चा समर्पण होना बहुत जरूरी है। उनका मानना है कि सिर्फ सैलरी के लिए काम करना सही नहीं है।
वहीं, दूसरी ओर, कई लोग इस फैसले की आलोचना कर रहे हैं। उनका कहना है कि एक प्रोफेशनल इंटरव्यू में धार्मिक ग्रंथों का इस्तेमाल करना ठीक नहीं है। ऐसे फैसलों से लोगों को ठेस पहुंच सकती है और यह भेदभाव का कारण भी बन सकता है। उनका तर्क है कि HR का काम उम्मीदवार की क्षमताओं और अनुभव का आकलन करना है, न कि उसकी धार्मिक या आध्यात्मिक प्रवृत्ति का।
एक यूजर ने लिखा, “यह बहुत ही अजीब फैसला है। HR का काम योग्यता देखना है, धार्मिक ज्ञान नहीं।” वहीं, दूसरे यूजर ने कहा, “अगर भगवद गीता के श्लोकों के आधार पर नौकरी मिलेगी, तो पता नहीं कितने लोग बेरोजगार हो जाएंगे।”
क्या कहता है एक्सपर्ट ओपिनियन?
HR एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनियों को हमेशा योग्यता, अनुभव और स्किल्स के आधार पर ही कर्मचारियों का चयन करना चाहिए। धार्मिक या व्यक्तिगत मान्यताओं को भर्ती प्रक्रिया से दूर रखना चाहिए। ऐसे फैसले वर्कप्लेस में विविधता और समावेश को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, कुछ लोग यह भी मानते हैं कि अगर HR को उम्मीदवार में काम के प्रति सच्ची लगन और समर्पण की कमी दिखती है, तो उसे उस पर विचार करने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए धार्मिक ग्रंथों का सहारा लेना शायद सही तरीका नहीं है।
यह घटना एक महत्वपूर्ण सवाल उठाती है कि क्या हमारी प्रोफेशनल लाइफ में पर्सनल और धार्मिक मान्यताओं का कोई स्थान है? इस पर आपकी क्या राय है?






