
Breaking Today, Digital Desk : हाल ही में न्यूयॉर्क में हुए स्थानीय चुनावों में ज़ोहरान ममदानी की जीत ने मुंबई की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। न्यूयॉर्क सिटी काउंसिल में अपनी जगह बनाने वाले ममदानी की जीत के बाद, मुंबई भाजपा के प्रमुख ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वे मुंबई में किसी भी ‘खान’ को मेयर नहीं बनने देंगे।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब मुंबई में आगामी महानगरपालिका चुनावों की सरगर्मियां तेज हो रही हैं। भाजपा के इस रुख से साफ है कि आने वाले चुनावों में पार्टी धार्मिक और जातीय समीकरणों को भुनाने की कोशिश कर सकती है। इस बयान के कई निहितार्थ हो सकते हैं और यह निश्चित रूप से राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का यह बयान मुंबई की मुस्लिम आबादी को परोक्ष रूप से निशाना बनाने की कोशिश है। मुंबई में एक बड़ी मुस्लिम आबादी है और ‘खान’ सरनेम मुस्लिम समुदाय में काफी प्रचलित है। ऐसे में यह बयान सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे सकता है।
दूसरी ओर, इस बयान को लेकर विपक्षी दलों ने भाजपा पर हमला बोलना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि भाजपा विकास और जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बयान दे रही है। उनका तर्क है कि मेयर का चुनाव योग्यता और जनता के समर्थन पर आधारित होना चाहिए, न कि किसी के नाम या धर्म पर।
यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और कितना गरमाता है। क्या भाजपा अपने इस रुख पर कायम रहेगी? क्या विपक्षी दल इस बयान को एक चुनावी हथियार के तौर पर इस्तेमाल करेंगे? ये सभी सवाल मुंबई की राजनीति के भविष्य को तय करेंगे।
फ़िलहाल, मुंबई में राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है और हर कोई इस बात पर नज़र रखे हुए है कि अगला कदम क्या होगा।






