
Breaking Today, Digital Desk : आज हम आपको एक ऐसी प्रेम कहानी सुनाने जा रहे हैं जो आपको हैरान कर देगी। यह कहानी है हैदराबाद के निज़ाम और लखनऊ की एक खूबसूरत दरबारी के बीच की। एक ऐसा प्यार जो परवान तो चढ़ा, लेकिन शादी के मुकाम तक नहीं पहुँच पाया।
एक मुलाकात जिसने सब बदल दिया
बात उन दिनों की है जब हैदराबाद के सातवें निज़ाम, मीर उस्मान अली खान, अपनी शानो-शौकत और दौलत के लिए पूरे भारत में मशहूर थे। एक बार उनका लखनऊ जाना हुआ। वहाँ एक महफ़िल में उनकी नज़र एक बेहद खूबसूरत दरबारी, ज़ैनब पर पड़ी। ज़ैनब अपनी अदाओं, अपनी गायकी और अपनी शायरी से किसी का भी दिल जीत लेती थी। निज़ाम भी उससे मिलते ही अपना दिल हार बैठे।
इश्क का परवान चढ़ना
निज़ाम मीर उस्मान अली खान को ज़ैनब से इतना गहरा प्यार हो गया कि उन्होंने उसे अपने साथ हैदराबाद ले जाने का फैसला कर लिया। ज़ैनब भी निज़ाम की तरफ आकर्षित थी। दोनों के बीच प्यार परवान चढ़ा और निज़ाम ने ज़ैनब को अपनी बेगम बनाने का मन बना लिया। उन्होंने ज़ैनब को बेशुमार दौलत, हीरे-जवाहरात और शाही ठाठ-बाट दिए। ज़ैनब हैदराबाद के शाही महल में रानी की तरह रहने लगी।
जब बीच में आई रवायतें
लेकिन, हर प्रेम कहानी का अंत सुखद हो, ऐसा जरूरी नहीं। निज़ाम के परिवार और उनके दरबारियों को यह रिश्ता पसंद नहीं था। उस समय के समाज में एक दरबारी से शादी करना शाही खानदान के लिए ठीक नहीं माना जाता था। निज़ाम पर लगातार दबाव बनाया गया कि वह इस रिश्ते को खत्म कर दें।
निज़ाम मीर उस्मान अली खान अपने परिवार और रवायतों के आगे मजबूर हो गए। भारी मन से उन्हें ज़ैनब से अलग होना पड़ा। यह उनके लिए एक बहुत मुश्किल फैसला था। ज़ैनब भी इस बात से टूट गई थी।
एक अधूरी प्रेम कहानी
ज़ैनब को वापस लखनऊ भेज दिया गया, लेकिन निज़ाम ने यह सुनिश्चित किया कि उसकी ज़िंदगी में कभी कोई कमी न आए। वह हमेशा ज़ैनब का ख्याल रखते रहे, भले ही वे साथ न रह सकें। यह कहानी आज भी हैदराबाद और लखनऊ के इतिहास में एक अधूरी लेकिन यादगार प्रेम कहानी के तौर पर दर्ज है।




