उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला: टाटा टेक्नोलॉजी के सहयोग से 121 राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थाओं का होगा आधुनिक उन्नयन

उत्तर प्रदेश सरकार ने तकनीकी शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने और युवाओं को उद्योग-तैयार बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड (TTL) के सहयोग से प्रदेश की 121 राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थाओं के उन्नयन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना के तहत प्रत्येक संस्था में ‘टाटा टेक्नोलॉजी एक्सीलेंस सेंटर’ की स्थापना की जाएगी।
प्रदेश में वर्तमान में 147 राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थाएं संचालित हैं, जहां विभिन्न एक से तीन वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के माध्यम से तकनीकी शिक्षा प्रदान की जा रही है। लेकिन समय के साथ तकनीकी क्षेत्र में बदलाव के चलते कई पाठ्यक्रम अब अप्रासंगिक हो चुके हैं। इन्हें वर्तमान उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिकीकरण की आवश्यकता है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह परियोजना शुरू की जा रही है।
परियोजना के तहत आधुनिक मशीनें और उपकरण संस्थाओं में स्थापित किए जाएंगे। प्रति संस्था 5732.12 लाख रुपये की लागत से यह कार्य किया जाएगा, जिससे कुल 6935.86 करोड़ रुपये का व्ययभार अनुमानित है। इसमें से 87% (6034.20 करोड़ रुपये) टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड वहन करेगी, जबकि शेष 13% (1063.96 करोड़ रुपये) राज्य सरकार द्वारा व्यय की जाएगी। साथ ही, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थापना हेतु प्रति संस्था 709.19 लाख रुपये की दर से कुल 858.12 करोड़ रुपये का व्यय भी राज्य सरकार वहन करेगी।
इस परियोजना के पहले चरण में 45 पॉलीटेक्निक संस्थाओं का उन्नयन पायलट प्रोजेक्ट के रूप में किया जाएगा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को न केवल आधुनिक तकनीकी ज्ञान प्राप्त होगा, बल्कि उन्हें सॉफ्ट स्किल, व्यक्तित्व विकास, इंडस्ट्री ओरिएंटेशन जैसी व्यावहारिक क्षमताएं भी हासिल होंगी।
इस कदम से उत्तर प्रदेश के डिप्लोमा सेक्टर में अध्ययनरत छात्रों को वैश्विक मानकों पर आधारित गुणवत्तायुक्त तकनीकी शिक्षा प्राप्त होगी। इससे युवाओं की नौकरी पाने की क्षमता (Employability) में भारी सुधार होगा और राज्य के औद्योगिक विकास को भी नई दिशा मिलेगी।
सरकार का यह निर्णय “डिजिटल स्किलिंग”, “मेक इन इंडिया” और “मेक फॉर वर्ल्ड” जैसे राष्ट्रीय अभियानों को गति देगा और उत्तर प्रदेश को तकनीकी शिक्षा का हब बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।




