
Breaking Today, Digital Desk : महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने 2008 के मालेगांव बम धमाका मामले में सभी आरोपियों के बरी होने के बाद एक ऐसा बयान दिया है, जिसने राष्ट्रीय राजनीति में एक नया तूफान खड़ा कर दिया है. उन्होंने “भगवा आतंकवाद” शब्द पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसकी जगह “सनातन या हिंदू आतंकवाद” कहा जाना चाहिए, जिससे एक बड़ा विवाद पैदा हो गया है.
विशेष एनआईए अदालत द्वारा 17 साल पुराने मालेगांव विस्फोट मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत सभी सात आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी करने के बाद से ही राजनीतिक बयानबाजी का दौर तेज हो गया है. इसी पृष्ठभूमि में चव्हाण की यह टिप्पणी सामने आई है.
पृथ्वीराज चव्हाण ने तर्क दिया कि ‘भगवा’ एक पवित्र रंग है, जो छत्रपति शिवाजी महाराज के ध्वज और वारकरी संप्रदाय से जुड़ा है, इसलिए इसे आतंकवाद से नहीं जोड़ा जाना चाहिए. उन्होंने कहा, “यदि आप ऐसे कृत्यों का वर्णन करना चाहते हैं, तो ‘हिंदू कट्टरपंथी’ या ‘हिंदू आतंकवाद’ का प्रयोग करें.” उन्होंने स्वतंत्र भारत की पहली आतंकवादी घटना महात्मा गांधी की हत्या को बताते हुए सवाल किया कि नाथूराम गोडसे किस धर्म का था. चव्हाण ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता.
कांग्रेस नेता ने जांच एजेंसियों और सरकार की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने पूछा, “अगर ये आरोपी निर्दोष थे, तो असली गुनहगार कौन हैं? किसी ने तो निर्दोष लोगों की जान ली है.” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि 2014 के बाद केंद्र और राज्य में बीजेपी की सरकार होने के बावजूद इस मामले को वापस क्यों नहीं लिया गया और 11 साल तक मुकदमा क्यों चलने दिया गया.
चव्हाण के बयान पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर “हिंदू आतंकवाद” की कहानी गढ़ने और वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि “आतंकवाद कभी भगवा नहीं था, न है और न कभी होगा,” और कांग्रेस से पूरे हिंदू समाज से माफी की मांग की.
इस बीच, जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने विशेष अदालत के इस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है. गौरतलब है कि 29 सितंबर 2008 को मालेगांव की एक मस्जिद के पास हुए इस विस्फोट में छह लोगों की मौत हो गई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. विशेष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि आरोपी इस धमाके के पीछे थे, और यह भी टिप्पणी की कि “आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता.”






