
Breaking Today, Digital Desk : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) को लेकर एक बहुत बड़ी बात कही है। उनका कहना है कि UNSC जो फैसले ले रहा है, वो अब दुनिया की असल ज़रूरतों और प्राथमिकताओं को नहीं दर्शाते। सीधे शब्दों में कहें तो, जो फैसले हो रहे हैं, वो शायद अब उस हिसाब से नहीं हैं जैसा पूरी दुनिया चाहती है।
जयशंकर का ये बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में भू-राजनीतिक उथल-पुथल चल रही है। यूक्रेन युद्ध हो या मध्य पूर्व में तनाव, कई बड़ी घटनाओं पर UNSC का रवैया अक्सर सवालों के घेरे में रहा है। जयशंकर ने साफ तौर पर इशारा किया है कि इस वैश्विक संस्था को अब खुद को बदलना होगा, ताकि ये आज के दौर की चुनौतियों का सामना कर सके। उन्होंने कहा कि “सब ठीक नहीं है” और ये बात हमें समझनी होगी।
उनकी बातों से ये भी लगता है कि भारत चाहता है कि UNSC में और देशों को जगह मिले, खासकर विकासशील देशों को, जिनकी आवाज़ अक्सर दब जाती है। अगर सुरक्षा परिषद सिर्फ कुछ ही देशों के एजेंडे पर चलता रहा, तो उसकी प्रासंगिकता कम होती जाएगी। जयशंकर ने वैश्विक सहयोग और बहुपक्षवाद (multilateralism) को मजबूत करने की बात पर भी जोर दिया, ताकि सभी देश मिलकर काम कर सकें।
कुल मिलाकर, जयशंकर का ये बयान सिर्फ एक आलोचना नहीं, बल्कि एक वेक-अप कॉल है। ये दिखाता है कि भारत अब वैश्विक मंच पर अपनी बात और भी मजबूती से रख रहा है और चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी समय के साथ बदलें।




