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वैश्विक व्यापार में हलचल, ट्रंप का नया टैरिफ़ दांव, भारत समेत कई देश निशाने पर…

Turmoil in global trade, Trump's new tariff bet, many countries including India are on target

Breaking Today, Digital Desk : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर संरक्षणवादी “अमेरिका फर्स्ट” नीति को अपनाते हुए एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत 7 अगस्त से लगभग 95 देशों और यूरोपीय संघ पर नए टैरिफ (आयात शुल्क) लागू हो जाएँगे। इस कदम से वैश्विक व्यापार में भारी उथल-पुथल की आशंका है। इन टैरिफ की दरें 10% से लेकर 41% तक हैं, जो विभिन्न देशों के साथ अमेरिका के व्यापारिक संबंधों और भू-राजनीतिक समीकरणों पर आधारित हैं।

इस नए टैरिफ़ ढांचे के तहत, भारत पर 25% का शुल्क लगाया गया है। यह फैसला भारत के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि भारत को किसी भी उत्पाद श्रेणी में छूट नहीं दी गई है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, इस शुल्क का असर फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उन सेक्टरों पर भी पड़ेगा, जिन्हें पहले अमेरिका में आयात शुल्क से छूट मिलती थी। व्हाइट हाउस के एक आर्थिक सलाहकार ने कहा है कि ट्रंप भारत के साथ व्यापार समझौते की बातचीत में प्रगति न होने से निराश हैं और यह टैरिफ एक “उपाय” है ताकि एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जा सके।

प्रमुख देश और उन पर टैरिफ की दरें:

सबसे ज्यादा प्रभावित: युद्धग्रस्त सीरिया पर 41% की उच्चतम दर लगाई गई है, जबकि लाओस और म्यांमार पर 40% का शुल्क लगेगा। इराक को 35% और स्विट्जरलैंड को 39% की दर का सामना करना पड़ेगा।

भारत और पड़ोसी: भारत पर 25% टैरिफ लगाया गया है। वहीं, पाकिस्तान पर 19% का शुल्क लगाया गया है।

कनाडा और अन्य सहयोगी: अमेरिका के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में से एक, कनाडा पर 35% की दर से शुल्क बढ़ाया गया है।हालांकि, यूके और ब्राजील जैसे देशों को राहत देते हुए उन पर केवल 10% का शुल्क लगाया गया है। यूरोपीय संघ के लिए यह दर 15% है।

यह कार्यकारी आदेश 7 अगस्त से प्रभावी होगा, जिससे देशों को बातचीत के लिए एक और सप्ताह का समय मिल गया है हालाँकि, कनाडा पर बढ़ी हुई दरें शुक्रवार से ही लागू हो गई हैं ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यापार असंतुलन को ठीक करने के लिए उठाया गया है। इस फैसले का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद है, जिससे अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ सकती हैं और विभिन्न उद्योगों की आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है।

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