
Breaking Today, Digital Desk : विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी तेज कर दी है. यह कदम कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा लगाए गए “वोट चोरी” के आरोपों और उसके बाद चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया से उत्पन्न हुए टकराव के बाद उठाया गया है. सोमवार को विपक्षी नेताओं की एक बैठक में इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया.
सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी दल सीईसी ज्ञानेश कुमार के हालिया बयानों और कार्यशैली से नाराज हैं. राहुल गांधी ने बिहार में मतदाता सूची में विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और “वोट चोरी” का आरोप लगाया था. इन आरोपों के जवाब में, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी से सात दिनों के भीतर हलफनामा दाखिल करने या फिर देश से माफी मांगने को कहा था. चुनाव आयोग ने इन आरोपों को “निराधार” और संविधान का “अपमान” करार दिया था.
इसी घटनाक्रम के बाद विपक्षी गठबंधन ने सीईसी के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने का मन बनाया है. विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहा है और सत्तारूढ़ दल के पक्ष में झुकाव रखता है. कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो पार्टी लोकतंत्र के सभी नियमों के तहत कड़े कदम उठाने पर विचार कर सकती है.
हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाना एक जटिल प्रक्रिया है. संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार, सीईसी को उसी तरह और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है. इसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से महाभियोग प्रस्ताव पारित करना आवश्यक है, जो कि मौजूदा संख्या बल के हिसाब से विपक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती है.
विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे इस प्रस्ताव के माध्यम से सीईसी के आचरण पर अपना विरोध दर्ज कराना चाहते हैं, भले ही प्रस्ताव पारित न हो पाए. यह मामला भारत की चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है.




