
Breaking Today, Digital Desk : याद है जब डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से आने वाले सामानों पर ऊंचे टैरिफ लगाए थे? उनका मानना था कि इससे अमेरिका का व्यापार घाटा कम होगा और अमेरिकी कंपनियों को फायदा मिलेगा। खैर, ये टैरिफ अभी भी लागू हैं, लेकिन हाल ही में एक अमेरिकी अपीलीय अदालत ने इन पर कुछ गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कोर्ट ने कहा है कि इन टैरिफ को लगाने में ‘सत्ता का दुरुपयोग’ हुआ है।
अब आप सोच रहे होंगे कि अगर कोर्ट ऐसा कह रहा है, तो टैरिफ क्यों नहीं हट रहे? दरअसल, बात ये है कि कोर्ट ने सीधे तौर पर टैरिफ को अवैध नहीं बताया है, बल्कि उनकी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट का कहना है कि प्रशासन ने इन टैरिफ को लगाते समय कुछ तय नियमों और प्रक्रियाओं का सही ढंग से पालन नहीं किया।
इसके बावजूद, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने फैसले का बचाव कर रहे हैं। उनका तर्क है कि ये टैरिफ अमेरिका के हित में थे और उन्होंने चीन को अनुचित व्यापार प्रथाओं से रोकने में मदद की। उनका मानना है कि इन टैरिफ ने अमेरिकी उद्योगों को सहारा दिया और देश में रोजगार पैदा किए।
तो अब सवाल ये है कि आगे क्या होगा? क्या ये टैरिफ हटेंगे या इनमें कोई बदलाव आएगा? फिलहाल, स्थिति थोड़ी अनिश्चित है। कोर्ट का यह फैसला निश्चित रूप से ट्रंप की व्यापार नीतियों के लिए एक झटका है, लेकिन चूंकि वे अब सत्ता में नहीं हैं, वर्तमान बिडेन प्रशासन को इस पर गौर करना होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि बिडेन प्रशासन इन टैरिफ पर क्या रुख अपनाता है और क्या अमेरिकी उपभोक्ताओं और व्यवसायों को इससे कोई राहत मिलती है।
यह मामला दिखाता है कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और टैरिफ जैसे मुद्दे कितने पेचीदा हो सकते हैं और कैसे उन पर कानूनी और राजनीतिक दोनों तरह के असर पड़ते हैं। आने वाले समय में यह देखना होगा कि इस फैसले का वैश्विक व्यापार संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ता है।




