
Breaking Today, Digital Desk : हाल ही में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने भारत की एसेट रिकवरी (संपत्ति वापसी) प्रणाली की जमकर तारीफ की है. उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को एक ‘ग्लोबल मॉडल एजेंसी’ बताया है, जो दुनिया के दूसरे देशों के लिए एक मिसाल है. ये खबर भारत के लिए कितनी अहम है, आइए जानते हैं.
FATF क्या है और इसका क्या काम है?
FATF एक अंतर-सरकारी संस्था है जिसे 1989 में स्थापित किया गया था. इसका मुख्य काम मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को सफेद करना), टेरर फाइनेंसिंग (आतंकवाद के लिए पैसा मुहैया कराना) और ऐसे दूसरे खतरों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक तय करना है. FATF यह भी देखता है कि देश इन मानकों को कितनी अच्छी तरह लागू कर रहे हैं.
भारत की तारीफ क्यों हुई?
FATF ने अपनी ‘एसेट रिकवरी गाइडेंस’ रिपोर्ट में भारत के ED की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाया है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे ED ने PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम) के तहत कार्रवाई करते हुए अपराधियों की संपत्तियों को जब्त किया और उन्हें पीड़ितों को वापस दिलाया. खासकर, विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे बड़े आर्थिक अपराधियों के मामलों में ED की कार्रवाई को एक बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है.
ED ने कैसे किया कमाल?
ED ने PMLA के तहत अब तक 1.12 लाख करोड़ रुपये की आपराधिक संपत्ति का पता लगाया है. इनमें से 98,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति को जब्त किया गया है और 15,186 करोड़ रुपये की संपत्ति बैंकों और पीड़ितों को वापस भी दिलाई गई है. यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एसेट रिकवरी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.
इस तारीफ का क्या मतलब है?
FATF की यह तारीफ भारत के वित्तीय जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. यह न केवल भारत की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत आर्थिक अपराधों से लड़ने और अपराधियों को जवाबदेह ठहराने के लिए कितना प्रतिबद्ध है. इससे दूसरे देशों के साथ भी भारत का सहयोग बढ़ेगा और अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने में मदद मिलेगी.
आगे क्या उम्मीदें हैं?
इस सफलता से ED और दूसरी भारतीय एजेंसियों का मनोबल बढ़ेगा. उम्मीद है कि वे भविष्य में भी इसी तरह से काम करते रहेंगे और अपराधियों की संपत्तियों को जब्त कर पीड़ितों को न्याय दिलाते रहेंगे.




