
Breaking Today, Digital Desk : धर्मस्थल चलो – ये तीन शब्द आजकल कर्नाटक की सियासत में ख़ूब सुनाई दे रहे हैं. ये सिर्फ़ एक नारा नहीं, बल्कि बीजेपी की तरफ़ से उठाया गया एक ऐसा क़दम है, जिसे कई लोग हिंदुत्व के पुराने वोट बैंक को फिर से अपनी तरफ़ खींचने की कोशिश मान रहे हैं. कर्नाटक में बीजेपी हमेशा से हिंदुत्व के मुद्दे पर काफ़ी मज़बूत रही है. लेकिन पिछले कुछ समय में शायद उसे लगा कि उसका यह कोर वोट बैंक थोड़ा खिसक रहा है. इसी को वापस लाने के लिए ‘धर्मस्थल चलो’ जैसा आंदोलन शुरू किया गया है.
अब सवाल ये उठता है कि आख़िर धर्मस्थल ही क्यों? धर्मस्थल दक्षिण कन्नड़ ज़िले में स्थित एक बहुत ही प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं. यह आस्था और विश्वास का एक बड़ा केंद्र है. बीजेपी ने शायद सोचा कि इस जगह से जुड़ाव दिखाकर वे सीधे-सीधे लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ सकते हैं.
इस आंदोलन के ज़रिए बीजेपी कर्नाटक के अलग-अलग हिस्सों में अपनी पकड़ मज़बूत करना चाहती है. उनका मक़सद है कि लोग फिर से पार्टी से जुड़ें और यह महसूस करें कि बीजेपी उनके धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ खड़ी है. यह एक तरह से मतदाताओं को याद दिलाने जैसा है कि हिंदुत्व ही बीजेपी की पहचान का अहम हिस्सा है.
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आने वाले चुनावों को देखते हुए बीजेपी का यह क़दम काफ़ी रणनीतिक है. वे जानते हैं कि हिंदुत्व कार्ड हमेशा से ही उनके लिए एक गेम चेंजर रहा है. ऐसे में ‘धर्मस्थल चलो’ आंदोलन के ज़रिए वे अपने पारंपरिक मतदाताओं को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बीजेपी इस आंदोलन से अपने कोर हिंदुत्व वोट बैंक को फिर से जगा पाएगी और चुनावी नतीजों पर इसका क्या असर होगा.






