
Breaking Today, Digital Desk : रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई एक बातचीत ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस बातचीत में पुतिन ने अलास्का में होने वाले एक संभावित शिखर सम्मेलन का जिक्र किया। ये सब तब हुआ जब दोनों नेता चीन के तियानजिन शहर में एक साझा कार में यात्रा कर रहे थे। इस दौरान उन्हें द्विपक्षीय मुद्दों पर बात करने का एक अनूठा अवसर मिला, जिसने उनके रिश्ते में एक और नया अध्याय जोड़ दिया है।
आपको याद होगा, कुछ समय पहले अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पुतिन को अलास्का में मिलने का न्योता दिया था। बाइडेन चाहते थे कि दोनों नेता वहां मिलकर कई महत्वपूर्ण वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करें। हालांकि, उस समय पुतिन ने इस प्रस्ताव पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। लेकिन अब, मोदी जी से हुई उनकी इस बातचीत में अलास्का का जिक्र आना वाकई दिलचस्प है।
चीन के तियानजिन में दोनों नेताओं का एक साथ कार में सफर करना अपने आप में एक बड़ी बात है। इससे पता चलता है कि भारत और रूस के बीच रिश्ते कितने मजबूत और सहज हैं। इस तरह की अनौपचारिक मुलाकातों से नेताओं को खुलकर बात करने और आपसी समझ बढ़ाने का मौका मिलता है, जो कि औपचारिक बैठकों में कई बार संभव नहीं हो पाता।
इस बातचीत में अलास्का समिट का जिक्र होना कई संकेत देता है। क्या पुतिन अब अलास्का में बाइडेन से मिलने की सोच रहे हैं? अगर ऐसा होता है, तो इसका भारत पर क्या असर पड़ेगा? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकारों के मन में उठ रहे हैं।
भारत हमेशा से ही वैश्विक शांति और सहयोग का समर्थक रहा है। रूस और अमेरिका दोनों ही भारत के महत्वपूर्ण साझेदार हैं। ऐसे में, अगर रूस और अमेरिका के बीच किसी भी तरह की बातचीत होती है, तो यह भारत के लिए भी सकारात्मक संकेत हो सकता है। यह दिखाता है कि भारत वैश्विक मंच पर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और उसके नेताओं का अंतरराष्ट्रीय संवाद में कितना प्रभाव है।
कुल मिलाकर, पुतिन और मोदी के बीच यह बातचीत कई मायनों में अहम है। इसने न केवल भारत-रूस संबंधों की गहराई को दिखाया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कुछ नए समीकरणों के संकेत दिए हैं। आने वाले समय में देखना होगा कि अलास्का समिट को लेकर क्या कुछ नया सामने आता है और इसका वैश्विक राजनीति पर क्या असर पड़ता है।



