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विवादित बोल पर चौतरफा घिरे अनिरुद्धाचार्य, माफी के बाद भी नहीं थम रहा बवाल…

Aniruddhacharya surrounded from all sides for his controversial statement, uproar continues even after apology

Breaking Today, Digital Desk : अपनी कथा और प्रवचनों के लिए जाने जाने वाले कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज इन दिनों अपने एक विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। अविवाहित महिलाओं पर की गई उनकी टिप्पणी के बाद देशभर में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। हालांकि, बढ़ते विरोध को देखते हुए अनिरुद्धाचार्य ने माफी मांग ली है, लेकिन यह मामला शांत होता नहीं दिख रहा है।

क्या है पूरा विवाद?

यह विवाद एक वायरल वीडियो से शुरू हुआ, जिसमें अनिरुद्धाचार्य एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि 25 साल की अविवाहित लड़कियों का चरित्र ठीक नहीं होता। वीडियो में उन्हें यह भी कहते सुना गया कि लड़कियों की शादी 14 साल की उम्र में ही कर देनी चाहिए ताकि वे परिवार में अच्छी तरह से घुल-मिल जाएं।

इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक हंगामा मच गया। विभिन्न महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे महिलाओं का अपमान बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई। मथुरा में तो महिला वकीलों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। मथुरा बार एसोसिएशन ने अनिरुद्धाचार्य का पुतला भी दहन किया।[4][9]

माफी और AI का दावा

चौतरफा आलोचना और बढ़ते दबाव के बाद, अनिरुद्धाचार्य ने एक वीडियो जारी कर अपने बयान के लिए माफी मांगी। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनकी बातों को गलत तरीके से पेश किया गया है और वायरल हो रहा वीडियो आधा-अधूरा है। उनका दावा है कि उन्होंने “कुछ” लड़कियों के संदर्भ में यह बात कही थी, सभी के लिए नहीं।

अनिरुद्धाचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि उनके वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है और इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाया गया है, ताकि उनकी छवि को खराब किया जा सके। उन्होंने कहा, “अगर मेरी किसी भी बात से किसी को दुख पहुंचा है तो मैं क्षमाप्रार्थी हूं।”

माफी के बावजूद शांत नहीं हुआ गुस्सा

अनिरुद्धाचार्य की माफी और दलीलों के बावजूद कई संगठन और लोग संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि माफी मांग लेना किसी के द्वारा किए गए अपमानजनक बयान के प्रभाव को कम नहीं करता। महिला अधिवक्ताओं का कहना है कि यह बयान न केवल महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि बाल विवाह जैसी कुरीति को भी बढ़ावा देता है, जो कानूनन अपराध है। इस मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग अभी भी जारी है।

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