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सिर्फ़ ऊंची उड़ान नहीं, स्वाद भी मायने रखता है, इंडिगो के खाने पर गरमाई बहस…

It's not just the high flight that matters, but the taste too; heated debate over IndiGo food...

Breaking Today, Digital Desk : हाल ही में, बायोकॉन की चेयरपर्सन, किरण मजूमदार शॉ ने इंडिगो की बिज़नेस क्लास में परोसे गए खाने को लेकर अपनी निराशा ज़ाहिर की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्हें बिज़नेस क्लास का ‘गॉरमेट मील’ बिल्कुल भी पसंद नहीं आया, और इसे ‘अरुचिकर और बेस्वाद’ बताया। उनका कहना था कि खाने की प्रस्तुति भी अच्छी नहीं थी और स्वाद भी फीका था।

किरण मजूमदार शॉ, जो अक्सर अपनी राय बेबाकी से रखती हैं, ने इस अनुभव को ‘बहुत निराशाजनक’ बताया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि शायद इंडिगो को अपने बिज़नेस क्लास के खाने के मेन्यू और गुणवत्ता पर फिर से विचार करना चाहिए, ताकि यात्रियों को एक बेहतर अनुभव मिल सके।

ज़ाहिर है, जब इतनी बड़ी शख्सियत किसी सेवा पर सवाल उठाती है, तो उस पर ध्यान जाना लाज़मी है। इंडिगो एयरलाइन ने इस शिकायत पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वे अपनी यात्री सेवाओं को गंभीरता से लेते हैं और यात्रियों के फीडबैक को महत्व देते हैं। एयरलाइन ने किरण मजूमदार शॉ से उनके यात्रा विवरण मांगे हैं ताकि वे इस मामले की पूरी जांच कर सकें और ज़रूरी सुधार कर सकें।

यह कोई पहला मौका नहीं है जब किसी एयरलाइन के खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठे हों। हवाई यात्रा के दौरान खाने को लेकर यात्रियों की उम्मीदें अक्सर ऊंची होती हैं, खासकर जब बात बिज़नेस क्लास जैसी प्रीमियम सेवाओं की हो। ऐसे में, यह घटना एयरलाइंस के लिए एक सीख हो सकती है कि वे न सिर्फ़ समय पर उड़ान भरने और आरामदेह सीटें देने पर ध्यान दें, बल्कि खाने के अनुभव को भी उतना ही महत्वपूर्ण समझें।

देखना होगा कि इंडिगो इस फीडबैक पर क्या कदम उठाता है और क्या भविष्य में उनके बिज़नेस क्लास का मेन्यू यात्रियों को और ज़्यादा पसंद आता है। आखिरकार, एक अच्छी यात्रा का अनुभव सिर्फ़ गंतव्य तक पहुंचने भर का नहीं होता, बल्कि उसमें सफर के दौरान मिलने वाली हर छोटी-बड़ी सुविधा भी मायने रखती है।

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