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ऑपरेशन सिंदूर पर तकरार, धनखड़ का इस्तीफा और ‘वोट चोरी’ के आरोपों के बीच समाप्त हुई कार्यवाही…

The proceedings ended amid the tussle over Operation Sindoor, Dhankhar's resignation and allegations of 'vote theft'

Breaking Today, Digital Desk : भारतीय संसद का मानसून सत्र, जो लगातार हंगामे, तीखी बहसों और अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाओं से भरा रहा, आखिरकार समाप्त हो गया। यह सत्र ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सरकार और विपक्ष के बीच जोरदार टकराव, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अप्रत्याशित इस्तीफे और बिहार में मतदाता सूची में विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर हुए जबरदस्त विरोध प्रदर्शनों के लिए याद किया जाएगा। इन मुद्दों पर हुए हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई, जिससे विधायी कामकाज पर भी गहरा असर पड़ा।

सत्र की सबसे बड़ी चर्चा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर हुई, जो पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई सैन्य कार्रवाई थी। सरकार ने इस ऑपरेशन को सैन्य और कूटनीतिक मोर्चे पर एक बड़ी सफलता बताया, वहीं विपक्ष ने पारदर्शिता, युद्धविराम और ऑपरेशन के पीछे की रणनीति पर गंभीर सवाल उठाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच इस मुद्दे पर तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।

विपक्ष ने पूरे सत्र के दौरान बिहार में चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे मतदाता सूची संशोधन (SIR) का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि यह संशोधन आगामी बिहार विधानसभा चुनावों से पहले मतदाताओं को disenfranchise करने (मताधिकार से वंचित करने) का एक प्रयास है। “वोट चोरी बंद करो” और “SIR बंद करो” जैसे नारों के साथ सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन भी किया, जिससे सदन में लगातार गतिरोध बना रहा।

सत्र के पहले ही दिन एक चौंकाने वाली घटना में, उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस अचानक इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी और इसके पीछे के वास्तविक कारणों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई गईं।

लगातार हो रहे हंगामे और विरोध प्रदर्शनों का सीधा असर संसद की उत्पादकता पर पड़ा। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सदन में “नियोजित व्यवधानों” और “नारेबाजी” पर चिंता व्यक्त की। सत्र के लिए आवंटित 120 घंटों में से लोक सभा में केवल 37 घंटे ही काम हो सका, जो कामकाज के लिहाज से एक बड़ी गिरावट है। तमाम व्यवधानों के बावजूद, सरकार ऑनलाइन गेमिंग विनियमन विधेयक, कराधान कानून (संशोधन) विधेयक और राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक सहित 12 विधेयक पारित कराने में सफल रही।

इस सत्र में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पेश किया गया एक विधेयक भी चर्चा में रहा, जिसमें गंभीर आरोपों में 30 दिनों तक हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान है। कुल मिलाकर, संसद का यह मानसून सत्र विधायी कार्यों से कहीं ज़्यादा राजनीतिक टकराव, विरोध और अप्रत्याशित घटनाओं के लिए जाना जाएगा।

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