
Breaking Today, Digital Desk : मृत्यु के बाद भी किसी की दुनिया को रोशन करने का विचार ही अपने आप में एक खूबसूरत एहसास है। नेत्रदान एक ऐसा ही महादान है, जो आपकी आँखों के माध्यम से दो लोगों के जीवन में उजाला भर सकता है। यह प्रक्रिया जितनी पुण्यदायी है, उतनी ही सरल भी है। आइए, इसे चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका के माध्यम से समझें।
नेत्रदान: एक सरल और सुगम मार्गदर्शिका
नेत्रदान की प्रक्रिया को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जा सकता है: संकल्प लेना और निधन के पश्चात की प्रक्रिया।
नेत्रदान का संकल्प लेना
पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन): नेत्रदान का इच्छुक कोई भी व्यक्ति अपने नजदीकी आई बैंक (नेत्र बैंक) में जाकर एक संकल्प पत्र या फॉर्म भर सकता है। आजकल कई अस्पताल और गैर-सरकारी संगठन ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा भी प्रदान करते हैं। पंजीकरण के बाद, आपको एक डोनर कार्ड प्रदान किया जाता है।
परिवार को सूचित करें: यह सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है। अपने परिवार के सदस्यों को नेत्रदान करने की अपनी इच्छा के बारे में स्पष्ट रूप से बताएं। आपकी मृत्यु के बाद, आपके परिवार की सहमति और समय पर दी गई सूचना ही आपके संकल्प को पूरा कर सकती है।
निधन के पश्चात की प्रक्रिया
यदि परिवार का कोई सदस्य नेत्रदान करना चाहता है या मृतक ने पहले से संकल्प लिया हो, तो परिवार को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
आई बैंक को सूचित करें: व्यक्ति के निधन के 4 से 6 घंटे के भीतर नजदीकी आई बैंक को तुरंत सूचित करना अनिवार्य है। आप 1919 (टोल-फ्री नंबर) पर भी संपर्क कर सकते हैं।
घर पर सावधानियां: आई बैंक की टीम के आने तक, कुछ सावधानियां बरतनी ज़रूरी हैं:
मृतक की पलकें धीरे से बंद कर दें और उन पर एक गीला, साफ़ कपड़ा या रुई रख दें।
पंखे बंद कर दें, लेकिन अगर एयर कंडीशनर है तो उसे चलाया जा सकता है।
मृतक के सिर के नीचे एक तकिया रखकर उसे थोड़ा ऊपर उठा दें।
कॉर्निया निकालने की प्रक्रिया: सूचना मिलने पर आई बैंक की एक प्रशिक्षित टीम खुद घर या अस्पताल आती है। यह पूरी प्रक्रिया केवल 15 से 20 मिनट की होती है और इसमें किसी प्रकार की चीर-फाड़ नहीं होती। टीम बहुत ही सम्मानजनक तरीके से केवल आंखों की बाहरी पारदर्शी परत, जिसे कॉर्निया कहते हैं, निकालती है। इससे मृतक के चेहरे पर कोई विकृति या निशान नहीं पड़ता है।
कौन कर सकता है नेत्रदान?
नेत्रदान से जुड़ी सबसे अच्छी बात यह है कि यह बहुत व्यापक है।
उम्र की कोई सीमा नहीं: किसी भी उम्र का व्यक्ति, चाहे वह बच्चा हो या बुज़ुर्ग, नेत्रदान कर सकता है।
स्वास्थ्य संबंधी स्थितियाँ: चश्मा पहनने वाले, मधुमेह (डायबिटीज), उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) या अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति भी अपनी आंखें दान कर सकते हैं। जिनका मोतियाबिंद का ऑपरेशन हो चुका है, वे भी नेत्रदान के योग्य हैं।
ब्लड ग्रुप और लिंग: नेत्रदान के लिए रक्त समूह या लिंग का कोई बंधन नहीं है।
कौन नहीं कर सकता नेत्रदान?
कुछ संक्रामक रोगों जैसे एड्स, हेपेटाइटिस बी या सी, रेबीज, टिटनेस और सेप्टीसीमिया से पीड़ित व्यक्ति की आंखें दान नहीं की जा सकतीं।
नेत्रदान का यह सरल कार्य दो जिंदगियों को देखने का अनमोल उपहार दे सकता है। यह एक ऐसा दान है जिसमें कुछ भी खर्च नहीं होता, बस एक नेक इरादे की जरूरत होती है।






