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देवोत्थान एकादशी 2025, इन 5 उपायों से पाएं लक्ष्मी-विष्णु का आशीर्वाद…

Devutthana Ekadashi 2025, Get Lakshmi-Vishnu's blessings with these 5 remedies...

Breaking Today, Digital Desk : देवोत्थान एकादशी का दिन हिन्दू धर्म में बहुत खास माना जाता है। यह वह पावन तिथि है जब भगवान विष्णु अपनी चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं और सृष्टि के संचालन का कार्यभार फिर से संभालते हैं। इस दिन को ‘देवउठनी एकादशी’ या ‘प्रबोधिनी एकादशी’ के नाम से भी जाना जाता है। साल 2025 में देवोत्थान एकादशी [तारीख यहाँ जोड़ें, उदा. 11 नवंबर] को पड़ रही है।

इस शुभ अवसर पर, भक्तजन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन किए गए कुछ खास उपाय जीवन में सुख-समृद्धि और शांति लाते हैं। अगर आप भी चाहते हैं कि आपके घर में हमेशा लक्ष्मी-विष्णु का वास रहे, तो आइए जानते हैं 5 ऐसे आसान उपाय जिन्हें आप देवोत्थान एकादशी पर कर सकते हैं:

  1. तुलसी विवाह का आयोजन: इस दिन तुलसी विवाह करना अत्यंत शुभ माना जाता है। भगवान शालिग्राम (विष्णु का एक रूप) और तुलसी माता का विवाह रचाने से कन्यादान का पुण्य मिलता है और घर में खुशहाली आती है। अपने घर के आंगन में या मंदिर में तुलसी विवाह का छोटा सा आयोजन ज़रूर करें।

  2. दीपदान और रंगोली: देवोत्थान एकादशी की शाम को अपने घर के मुख्य द्वार पर और पूजा स्थल पर घी के दीपक ज़रूर जलाएं। दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है। साथ ही, घर के मुख्य द्वार पर सुंदर रंगोली बनाएं, यह देवी लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक है।

  3. पीले वस्त्र और वस्तुएं दान करें: भगवान विष्णु को पीला रंग बहुत प्रिय है। इस दिन पीले वस्त्र, पीले फल (जैसे केला, आम) या बेसन के लड्डू जैसी पीली वस्तुओं का दान करना बहुत शुभ होता है। किसी गरीब या ज़रूरतमंद व्यक्ति को दान करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और आपकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

  4. विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ: देवोत्थान एकादशी के दिन ‘विष्णु सहस्त्रनाम’ का पाठ करना बेहद फलदायी होता है। यदि आप पूरा पाठ नहीं कर सकते, तो ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे मन को शांति मिलती है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।

  5. सात्विक भोजन और उपवास: इस पवित्र दिन पर उपवास रखना सबसे उत्तम माना जाता है। यदि आप पूर्ण उपवास नहीं कर सकते, तो कम से कम सात्विक भोजन ग्रहण करें, जिसमें लहसुन-प्याज न हो। इस दिन तामसिक भोजन (मांस, मदिरा) से पूरी तरह दूर रहें। इससे शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं।

देवोत्थान एकादशी का यह पावन पर्व आपके जीवन में नई उमंग और खुशियां लाए। इन सरल उपायों को अपनाकर आप भी भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

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