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नवरात्रि का पहला दिन, क्या आप जानते हैं माँ शैलपुत्री की ये खास बातें…

First day of Navratri, do you know these special things about Maa Shailputri...

Breaking Today, Digital Desk : नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो चुका है! इन नौ दिनों में हम माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा करते हैं। आज है नवरात्रि का पहला दिन, और आज हम पूजेंगे माँ शैलपुत्री को। इन्हें हिमालय राज की बेटी कहा जाता है। आइए जानते हैं कैसे करें माँ शैलपुत्री की पूजा, कौन से मंत्रों का जाप करें और क्या है उनकी आरती।

माँ शैलपुत्री कौन हैं?

शैलपुत्री, जैसा कि नाम से ही पता चलता है, ‘शैल’ यानी पर्वत और ‘पुत्री’ यानी बेटी। पौराणिक कथाओं के अनुसार, ये ही देवी सती हैं जिन्होंने अपने अगले जन्म में हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया। इनका स्वरूप अत्यंत शांत और सौम्य है। इनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल का फूल होता है। ये नंदी (बैल) पर सवार रहती हैं।

पूजा विधि:

नवरात्रि के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
एक चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर माँ दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
सबसे पहले कलश स्थापना करें। इसके लिए एक मिट्टी के कलश में पानी भरकर उसमें गंगाजल, सिक्का, सुपारी, अक्षत (चावल), दूर्वा घास और फूल डालें। कलश के मुख पर आम के पत्ते लगाकर उस पर नारियल रखें।
माँ शैलपुत्री का ध्यान करें और दीपक जलाएं।
उन्हें रोली, कुमकुम, अक्षत, फूल, सिंदूर आदि अर्पित करें।
फल और मिठाई का भोग लगाएं।
फिर उनके मंत्रों का जाप करें।

माँ शैलपुत्री के मंत्र:

  • ध्यान मंत्र:
    वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखराम्।
    वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

  • प्रार्थना मंत्र:
    ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
    या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

इन मंत्रों का जाप करने से माँ शैलपुत्री प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं।

माँ शैलपुत्री की आरती:

जय अम्बे गौरी मैया, जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
मांग सिंदूर विराजत, टिको मृगमद को।
उज्जवल से दो नैना, चंद्रबदन नीको॥
कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजे।
रक्त पुष्प गल माला, कंठन पर साजे॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग कृपाण धारी।
सुर नर मुनि जन सेवत, तिनके दुख हारी॥
कानन कुंडल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटि चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योति॥
शुंभ निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥
ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम हो वरदानी॥
चौंसठ योगिनी मंगल, नृत्य करत भयरा।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥
तुम ही शिव सुंदर शुभ, तुम ही वेद सुखदानी।
तुम ही दुर्गे जग तारिणी, तुम ही सृष्टि रचानी॥
आरती मैया की जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख संपति पावे॥

पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा करके हम नवरात्रि की शुरुआत करते हैं। माँ शैलपुत्री आप सभी की मनोकामनाएं पूरी करें!

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