
Breaking Today, Digital Desk : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग और ममता बनर्जी सरकार के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। चुनाव आयोग ने अनियमितताओं के आरोप में चार वरिष्ठ अधिकारियों और एक डेटा एंट्री ऑपरेटर को तत्काल निलंबित करने का आदेश दिया था। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस आदेश को मानने से इनकार करते हुए कहा है कि वह अपने अधिकारियों की रक्षा करेंगी, जिन्हें उन्होंने अपना “पहरेदार” बताया है। इस घटनाक्रम ने राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।
यह पूरा मामला दक्षिण 24 परगना के बरुईपुर पूर्व और पूर्व मेदिनीपुर के मोयना विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ा है, जहां मतदाता सूची तैयार करने में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप सामने आए हैं। चुनाव आयोग की जांच में पता चला कि इन क्षेत्रों में न केवल गलत तरीके से मतदाताओं के नाम जोड़े गए, बल्कि अधिकारियों ने डेटा सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करते हुए अपनी लॉगिन आईडी भी एक-दूसरे से साझा की थी।
चुनाव आयोग ने इसे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 का गंभीर उल्लंघन मानते हुए दो निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (ERO), दो सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (AERO) और एक डेटा एंट्री ऑपरेटर को निलंबित करने का निर्देश दिया था। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को इन सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का भी आदेश दिया है।
हालांकि, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की इस कार्रवाई पर तीखा विरोध जताया है। उन्होंने आयोग के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य के अधिकारियों को डराने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। एक जनसभा में उन्होंने स्पष्ट कहा, “हम उन्हें निलंबित नहीं करेंगे… हम आपकी सुरक्षा करेंगे। मैं आपकी ‘पहरेदार’ बनी रहूंगी।”
इस बीच, चुनाव आयोग अपने फैसले पर अडिग है। आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को एक नया नोटिस जारी कर 11 अगस्त तक निलंबन के आदेश पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इस टकराव से राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है।






