Sliderदेश-विदेश

गाजा युद्ध क्या ट्रंप का खेल खत्म, इजरायल-कतर विवाद से टूटती शांति की डोर…

Gaza war Is Trump's game over, Israel-Qatar dispute breaks the thread of peace...

Breaking Today, Digital Desk : आजकल की भागदौड़ भरी दुनिया में हर खबर पर हमारी नजर रहती है, खासकर जब बात अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और युद्ध जैसे गंभीर मुद्दों की हो। गाजा में चल रहा संघर्ष एक ऐसा ही मुद्दा है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हालिया घटनाओं को देखकर कई लोग यह सोचने लगे हैं कि क्या अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा युद्ध को लेकर बनाई गई रणनीति और उस पर उनकी पकड़ कमजोर हो रही है?

याद कीजिए, ट्रंप प्रशासन के दौरान मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने के कई प्रयास हुए थे, जिनमें ‘अब्राहम समझौते’ (Abraham Accords) जैसे बड़े कदम शामिल थे। इन समझौतों का मकसद इजरायल और कुछ अरब देशों के बीच सामान्य संबंध स्थापित करना था। उस वक्त ऐसा लग रहा था कि ट्रंप मध्य पूर्व की राजनीति में एक मजबूत खिलाड़ी बनकर उभरे हैं। लेकिन, मौजूदा गाजा संकट और इजरायल-कतर संबंधों में आई खटास ने समीकरणों को काफी हद तक बदल दिया है।

इजरायल का कतर पर हमला: एक बिगड़ता समीकरण

हाल ही में इजरायल द्वारा कतर पर किए गए कथित हमलों ने राजनयिक हलकों में हलचल मचा दी है। कतर, जो लंबे समय से गाजा में मानवीय सहायता पहुंचाने और हमास के साथ मध्यस्थता करने में अहम भूमिका निभाता रहा है, उस पर इस तरह का हमला कई सवाल खड़े करता है।

कतर केवल एक छोटा सा खाड़ी देश नहीं है, बल्कि यह गाजा पट्टी में शांति प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी भी है। हमास के कई नेता कतर में रहते हैं, और कतर ने अतीत में इजरायल और हमास के बीच कैदियों की अदला-बदली और युद्धविराम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में, इजरायल का कतर के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाना, शांति प्रयासों को और जटिल बना सकता है।

क्या यह हमला ट्रंप द्वारा स्थापित की गई पुरानी शांति योजनाओं को पलीता लगा रहा है? या फिर यह मध्य पूर्व में एक नए पावर गेम की शुरुआत है? यह समझना जरूरी है कि जब एक मध्यस्थ देश को निशाना बनाया जाता है, तो बातचीत के रास्ते बंद होने का खतरा बढ़ जाता है।

टूटती शांति योजना और भविष्य की चुनौतियाँ

ट्रंप प्रशासन ने जिस ‘डील ऑफ द सेंचुरी’ (Deal of the Century) की बात की थी, वह गाजा और फिलिस्तीनी मुद्दे को सुलझाने का एक महत्वाकांक्षी प्रयास था। हालांकि, इसे कभी भी फिलिस्तीनियों का पूरा समर्थन नहीं मिला। मौजूदा हालात में, जब गाजा में संघर्ष तेज हो रहा है और क्षेत्रीय समीकरण बदल रहे हैं, तो यह शांति योजना पूरी तरह से बिखरती हुई नजर आ रही है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने अब बड़ी चुनौती है। गाजा में मानवीय संकट गहराता जा रहा है, और अगर शांति के रास्ते बंद होते हैं, तो स्थिति और भी विस्फोटक हो सकती है। क्या नए सिरे से बातचीत की शुरुआत हो पाएगी? क्या कोई नया मध्यस्थ सामने आएगा जो इजरायल और हमास दोनों को बातचीत की मेज पर ला सके?

ये ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब आने वाला वक्त ही देगा। लेकिन इतना तो तय है कि मध्य पूर्व की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है, और इसमें सभी खिलाड़ियों को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना होगा।

Related Articles

Back to top button