राहुल गांधी पर भाजपा का निशाना, कांग्रेस बोली – दलितों का अपमान…
Controversy over comparison with Ambedkar, BJP targets Rahul Gandhi, Congress says - Insult of Dalits

Breaking Today, Digital Desk : कांग्रेस नेता उदित राज द्वारा राहुल गांधी की तुलना संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर से किए जाने पर राजनीतिक गलियारों में तूफान खड़ा हो गया है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस बयान को दलितों और बाबासाहेब का घोर अपमान करार देते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है. वहीं, कांग्रेस ने पलटवार करते हुए इसे भाजपा की दलित विरोधी मानसिकता का परिचायक बताया है.
यह पूरा विवाद कांग्रेस नेता उदित राज के उस बयान से शुरू हुआ जिसमें उन्होंने कहा कि यदि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लोग राहुल गांधी की बातों का अनुसरण करें, तो राहुल उनके लिए दूसरे अंबेडकर साबित हो सकते हैं. उदित राज का यह बयान दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में हुए कांग्रेस के ‘भागीदारी न्याय सम्मेलन’ के बाद आया, जहां राहुल गांधी ने स्वीकार किया था कि यूपीए शासनकाल में जातिगत जनगणना न कराना एक गलती थी.
भाजपा का हमला: “यह बाबासाहेब का अपमान है”
भाजपा ने इस तुलना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कांग्रेस से माफी की मांग की है. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि बाबासाहेब अंबेडकर की तुलना राहुल गांधी से करना गंभीर रूप से आपत्तिजनक है. भाजपा गौरव भाटिया ने कांग्रेस पर ओबीसी समुदाय का बार-बार अपमान करने का आरोप लगाया. भाजपा के आईट सेल प्रमुख अमित मालवीय ने इसे अंबेडकर की विरासत को कम करने की साजिश करार दिया. उन्होंने सवल उठाया कि कांग्रेस दूसरा नेहरू क्यों नहीं खोज रही?
भाजपा नेताओ ने यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस ने हमेशा डॉ. अंबेडकर का अपमान किया और उन्हें भारत रत्न से भी सम्मानित नहीं किया. बिहार सरकार में मंत्री और भाजपा नेता जनक राम ने कहा कि राहुल गांधी की तुलना किसी से करना अंबेडकर का अपमान है और कांग्रेस ने दलितों को हमेशा सिर्फ वोट बैंक समझा है.
कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. पार्टी का कहना है कि राहुल गांधी लगातार सामाजिक न्याय और ओबीसी, दलितों और आदिवासियों के अधिकारों की बात कर रहे हैं, जिससे भाजपा बौखला गई है. कांग्रेस का तर्क है कि राहुल गांधी का जातिगत जनगणना पर जोर देना और समाज के वंचित वर्गों के लिए उनकी लड़ाई उन्हें अंबेडकर के दिखाए रास्ते पर आगे बढ़ाती है.
इस पूरे मामले ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में डॉ. अंबेडकर की विरासत पर बहस छेड़ दी है. जहां भाजपा कांग्रेस पर अंबेडकर के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगा रही है, वहीं कांग्रेस खुद को दलितों और पिछड़ों का सच्चा हितैषी साबित करने में जुटी है. इस राजनीतिक घमासान के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इसका असर देश की राजनीति, विशेषकर दलित और ओबीसी वोट बैंक पर क्या पड़ता है.






