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पाकिस्तान की कबाड़ एक्सप्रेस, सोशल मीडिया पर दर्द और उपहास की कहानी…

Pakistan's Junk Express, a story of pain and ridicule on social media

Breaking Today, Digital Desk : पाकिस्तान की एक ट्रेन का वीडियो इन दिनों इंटरनेट पर चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन इसकी वजह कोई बुलेट ट्रेन जैसी आधुनिक तकनीक नहीं, बल्कि उसकी खस्ता हालत है। टूटी-फूटी सीटें, जंग लगी दीवारें और चारों तरफ फैली गंदगी ने इस ट्रेन को “चलता-फिरता कबाड़खाना” का नाम दे दिया है। यह वीडियो पाकिस्तान रेलवे की दुखद हकीकत को बयां कर रहा है, जिसे देखकर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ इसे लेकर मीम्स बना रहे हैं तो कुछ पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर तंज कस रहे हैं।

वायरल हो रहे वीडियो में, जो कथित तौर पर कराची और पेशावर के बीच चलने वाली ‘अवाम एक्सप्रेस’ का बताया जा रहा है, ट्रेन के डिब्बे की भयावह तस्वीर दिखाई देती है। फर्श पर कूड़े का ढेर लगा है, सीटें अपनी जगह से उखड़ी हुई हैं और डिब्बों की दीवारों में जंग लग चुकी है, यहाँ तक कि कुछ जगहों पर बड़े-बड़े छेद भी नजर आ रहे हैं। इस तरह की खतरनाक स्थिति में यात्रियों का सफर करना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है।

यह वीडियो न केवल पाकिस्तान रेलवे की बदहाली को उजागर करता है, बल्कि देश के सामने खड़े आर्थिक संकट की भी पोल खोलता है। सोशल मीडिया पर यूजर्स इस वीडियो को लेकर पाकिस्तानी सरकार और व्यवस्था पर जमकर निशाना साध रहे हैं। एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा, “यह पाकिस्तान की सबसे आधुनिक ट्रेन है और इन्हें कश्मीर चाहिए।” वहीं कुछ लोगों ने इसे “मानव तस्करी बस” जैसा बताया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान रेलवे की यह दुर्दशा दशकों की उपेक्षा और भ्रष्टाचार का नतीजा है। कई ट्रेनें और पटरियां बहुत पुरानी हो चुकी हैं और उनके रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आलम यह है कि 100 से अधिक लोकोमोटिव अपनी तय उम्र पार कर चुके हैं, लेकिन फंड की कमी के कारण उन्हें बदला नहीं जा सका है। इसका खामियाजा आम यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है, जो अपनी जान जोखिम में डालकर इन ट्रेनों में सफर करने को मजबूर हैं।

यह घटना सिर्फ एक ट्रेन की कहानी नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान की पूरी रेलवे व्यवस्था पर एक गंभीर सवालिया निशान है। जहां एक ओर दुनिया हाई-स्पीड ट्रेनों की बात कर रही है, वहीं पाकिस्तान में लोगों को सुरक्षित और आरामदायक रेल यात्रा जैसी बुनियादी सुविधा भी मयस्सर नहीं है।

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