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PCOS और आपके शरीर पर इसका असर, त्वचा, बाल और सेहत से जुड़ी हर बात…

PCOS and its effects on your body, skin, hair and everything related to health...

Breaking Today, Digital Desk : क्या आपको भी ऐसा लगता है कि आपके बाल कुछ ज़्यादा ही झड़ रहे हैं, या त्वचा पर मुंहासे कम होने का नाम नहीं ले रहे? और वज़न घटाना तो जैसे नामुमकिन सा हो गया है? अगर हाँ, तो हो सकता है कि आपकी इस उलझन के पीछे PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) हो। यह आजकल महिलाओं में काफी आम हो गया है, और इसका सीधा संबंध हमारे शरीर के हॉर्मोन्स से है। आइए, जानते हैं कि PCOS कैसे हमारे हॉर्मोन्स को बिगाड़ता है और इसका हमारी त्वचा, बालों और पूरी सेहत पर क्या असर होता है।

हॉर्मोन्स का खेल: जब PCOS करता है गड़बड़

हमारे शरीर में सब कुछ हॉर्मोन्स के इशारे पर चलता है। PCOS में जो मुख्य हॉर्मोनल असंतुलन होता है, वह है एण्ड्रोजन (पुरुष हॉर्मोन्स) का बढ़ जाना। हालाँकि, महिलाओं में भी ये हॉर्मोन्स थोड़ी मात्रा में होते हैं, पर जब इनकी मात्रा ज़्यादा हो जाती है, तो कई तरह की दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। इसके अलावा, इंसुलिन रेजिस्टेंस (जब शरीर इंसुलिन का सही से इस्तेमाल नहीं कर पाता) भी एक बड़ी वजह है, जिससे हॉर्मोन्स और बिगड़ते हैं।

त्वचा पर PCOS का वार: मुंहासे और अनचाहे बाल

  • मुंहासे (Acne): जब एण्ड्रोजन हॉर्मोन्स बढ़ जाते हैं, तो हमारी त्वचा की तेल ग्रंथियाँ (sebaceous glands) ज़्यादा तेल बनाने लगती हैं। यह अतिरिक्त तेल रोमछिद्रों को बंद कर देता है, जिससे मुंहासे, फुंसियाँ और कई बार तो सिस्ट भी बन जाते हैं। ये मुंहासे अक्सर चेहरे, पीठ और छाती पर देखने को मिलते हैं।

  • अनचाहे बाल (Hirsutism): एण्ड्रोजन के बढ़ने से महिलाओं के शरीर पर उन जगहों पर बाल उगने लगते हैं जहाँ आमतौर पर पुरुषों के उगते हैं, जैसे ऊपरी होंठ, ठोड़ी, छाती और पेट। इसे हिर्सुटिज़्म कहते हैं। यह कई महिलाओं के लिए बहुत परेशान करने वाला हो सकता है।

  • काली या मोटी त्वचा (Acanthosis Nigricans): कुछ महिलाओं में गर्दन के पीछे, काँखों में या जाँघों के अंदरूनी हिस्से में त्वचा काली और मोटी होने लगती है। यह अक्सर इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत होता है।

बालों का झड़ना: सिर के बाल कम, शरीर पर ज़्यादा

PCOS में एण्ड्रोजन का स्तर बढ़ने से सिर के बाल पतले होकर झड़ने लगते हैं। इसे फीमेल पैटर्न हेयर लॉस कहते हैं, जिसमें बालों की लकीर पीछे हटने लगती है या सिर के बीच के बाल कम होने लगते हैं। यह एंड्रोजेनिक एलोपेसिया के नाम से भी जाना जाता है।

पूरी सेहत पर असर: वज़न, मूड और बहुत कुछ

हॉर्मोनल असंतुलन सिर्फ त्वचा और बालों तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि यह आपके पूरे शरीर को प्रभावित करता है:

  • वज़न बढ़ना और घटाने में मुश्किल: इंसुलिन रेजिस्टेंस और एण्ड्रोजन के बढ़ने से वज़न घटाना बहुत मुश्किल हो जाता है। शरीर फैट को ज़्यादा स्टोर करने लगता है, खासकर पेट के आसपास।

  • अनियमित पीरियड्स: यह PCOS का एक और आम लक्षण है। पीरियड्स देर से आना, कम या ज़्यादा होना, या बिल्कुल न आना।

  • मूड स्विंग्स और डिप्रेशन: हॉर्मोनल उतार-चढ़ाव आपके मूड को भी प्रभावित कर सकते हैं, जिससे चिड़चिड़ापन, चिंता या डिप्रेशन महसूस हो सकता है।

  • फर्टिलिटी की समस्याएँ: PCOS गर्भवती होने में दिक्कतें पैदा कर सकता है क्योंकि यह ओव्यूलेशन (अंडाशय से अंडा निकलने की प्रक्रिया) को प्रभावित करता है।

क्या करें? समाधान है संभव!

अच्छी खबर यह है कि PCOS को मैनेज किया जा सकता है और इसके लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है।

  • जीवनशैली में बदलाव: स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और वज़न को कंट्रोल में रखना बहुत ज़रूरी है।

  • डॉक्टर की सलाह: अपने डॉक्टर से मिलें। वे आपको सही निदान और इलाज बता सकते हैं, जिसमें दवाएँ या अन्य उपचार शामिल हो सकते हैं।

  • तनाव कम करें: योग, ध्यान या कोई और पसंदीदा गतिविधि करके तनाव को कम करने की कोशिश करें।

याद रखें, आप अकेली नहीं हैं। PCOS एक ऐसी स्थिति है जिसे सही जानकारी और देखभाल से बेहतर बनाया जा सकता है। अपने शरीर को समझें और सही कदम उठाएँ!

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