
Breaking Today, Digital Desk : हाल ही में हुए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों (National Film Awards) को लेकर देश में एक नई बहस छिड़ गई है। खासकर सोशल मीडिया पर यह सवाल खूब उठ रहा है कि आखिर इतने बड़े अभिनेता शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) को किसी भी कैटेगरी में अवार्ड क्यों नहीं मिला। इसी बात को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा है और आरोप लगाया है कि विपक्ष राष्ट्रीय पुरस्कारों का राजनीतिकरण कर रहा है।
भाजपा का कहना है कि कांग्रेस ने जानबूझकर यह मुद्दा उठाया है, जबकि उन्हें पता है कि जूरी अपने फैसले पूरी तरह से योग्यता के आधार पर लेती है। भाजपा के कई नेताओं ने इस बात पर जोर दिया है कि पुरस्कार किसी एक व्यक्ति या पार्टी की पसंद पर नहीं दिए जाते, बल्कि एक निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत चुने जाते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पुरस्कारों का मकसद भारतीय सिनेमा के बेहतरीन काम को पहचानना है, न कि किसी खास एजेंडे को बढ़ावा देना।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब कुछ कांग्रेस नेताओं और उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया पर यह सवाल उठाना शुरू कर दिया कि शाहरुख खान जैसे बड़े सितारे को ‘पठान’ या ‘जवान’ जैसी हिट फिल्मों के बावजूद राष्ट्रीय सम्मान क्यों नहीं मिला। उनका इशारा इस ओर था कि कहीं इसके पीछे कोई राजनीतिक कारण तो नहीं है।
हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह सिर्फ विपक्ष की हताशा है जो हर चीज में राजनीति ढूंढता है। भाजपा के एक प्रवक्ता ने कहा, “शाहरुख खान एक महान कलाकार हैं और उनके काम को देश हमेशा सराहता है। लेकिन राष्ट्रीय पुरस्कारों को राजनीतिक चश्मे से देखना गलत है। जूरी के सदस्य अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ होते हैं और वे पूरी ईमानदारी से अपना काम करते हैं।”
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर कला और राजनीति के बीच की बारीक रेखा को उजागर कर दिया है। जहां एक तरफ फिल्म प्रेमियों को यह लग रहा है कि उनके पसंदीदा कलाकार को सम्मान मिलना चाहिए था, वहीं दूसरी तरफ सरकार और पुरस्कार समिति का कहना है कि प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं होता। अब देखना यह है कि यह बहस और कितनी आगे जाती है और क्या इससे भविष्य में पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया पर कोई असर पड़ता है या नहीं।






