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द्वि-राष्ट्र सिद्धांत पर पाकिस्तान में फिर बहस, शहबाज शरीफ ने दिया बड़ा बयान…

Debate again in Pakistan on two-nation theory, Shahbaz Sharif made a big statement on Independence Day

Breaking Today, Digital Desk : पाकिस्तान के 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक बार फिर द्वि-राष्ट्र सिद्धांत को पाकिस्तान के अस्तित्व का आधार बताया। उन्होंने इस सिद्धांत को पाकिस्तान के निर्माण की जीत करार दिया। उनके इस बयान ने भारत और पाकिस्तान के ऐतिहासिक संबंधों और विभाजन की विरासत पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में कहा कि पाकिस्तान का निर्माण द्वि-राष्ट्र सिद्धांत की विजय का प्रतीक है। गौरतलब है कि द्वि-राष्ट्र सिद्धांत का प्रतिपादन करते हुए यह तर्क दिया गया था कि हिंदू और मुसलमान दो अलग-अलग राष्ट्र हैं और वे एक साथ नहीं रह सकते। इसी सिद्धांत के आधार पर भारत का विभाजन हुआ और 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान एक स्वतंत्र राष्ट्र बना।

दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान ने शुरू में अपना स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को ही मनाया था। हालांकि, बाद में इसे बदलकर 14 अगस्त कर दिया गया। इसके पीछे कई कारण बताए जाते हैं, जिनमें लॉर्ड माउंटबेटन के व्यस्त कार्यक्रम से लेकर रमजान के महीने की धार्मिक मान्यताएं शामिल हैं।

प्रधानमंत्री शरीफ के इस बयान को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के छह साल पूरे होने के कुछ ही दिन बाद आया है, जब उन्होंने और पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर सहित अन्य नेताओं ने कश्मीर के प्रति एकजुटता दिखाने की बात कही थी। शरीफ ने उस समय अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कश्मीर में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन को रोकने और 5 अगस्त, 2019 की कार्रवाइयों को पलटने में भूमिका निभाने का आग्रह किया था।

शहबाज शरीफ के ताजा बयान को पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति और भारत के साथ उसके संबंधों के संदर्भ में देखा जा रहा है। एक तरफ जहां पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) जैसे विपक्षी दल सरकार पर दबाव बनाए हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ शरीफ की सरकार भारत के साथ संबंधों में किसी भी तरह की नरमी के संकेत नहीं देना चाहती।

विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने की प्रक्रिया को और जटिल बना सकते हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में इस पर भारत की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और इसका दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर क्या असर पड़ता है।

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