
Breaking Today, Digital Desk : उत्तराखंड के उत्तरकाशी में बादल फटने की विनाशकारी घटना ने पूरे इलाके में तबाही का मंजर छोड़ दिया है। इस प्रलय के दिल दहला देने वाले दृश्य सामने आए हैं, जहाँ बचाव दल अपनी जान पर खेलकर जिंदगियों को बचाने के लिए एक अथक अभियान में जुटे हुए हैं। नुकसान का पूरा आकलन अभी किया जा रहा है, लेकिन शुरुआती तस्वीरें एक भयानक आपदा की कहानी बयां करती हैं।
यह आपदा मंगलवार को धराली और सुखी टॉप क्षेत्रों में बादल फटने के बाद शुरू हुई, जिससे खीर गंगा नदी में अचानक और विनाशकारी बाढ़ आ गई। उफनती लहरें और भारी मलबा अपने रास्ते में आने वाले घरों, होटलों और यहां तक कि सड़कों को भी बहा ले गया, जिससे बड़े पैमाने पर विनाश हुआ। कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, और मलबे में दबे होने की आशंका है।
घटना के तुरंत बाद, भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमों ने मोर्चा संभाल लिया। खराब मौसम और टूटी सड़कों जैसी कठिन चुनौतियों के बावजूद, बचावकर्मी फंसे हुए लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। अब तक 150 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।
स्थानीय निवासियों ने उस भयावह मंजर को याद किया जब उन्होंने अपनी आंखों के सामने घरों और होटलों को ताश के पत्तों की तरह ढहते देखा। कई होटलों और होमस्टे के बह जाने की खबर है। यह क्षेत्र, जो गंगोत्री धाम के पास स्थित है, पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के बीच लोकप्रिय है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्थिति का जायजा लेने के लिए खुद प्रभावित क्षेत्र में मौजूद हैं और राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी स्थिति से अवगत कराया है, जिन्होंने केंद्र से हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। बचाव कार्यों में मदद के लिए ड्रोन और खोजी कुत्तों को भी तैनात किया गया है।
यह घटना 2013 की केदारनाथ त्रासदी की दर्दनाक यादें ताजा करती है और हिमालयी क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी और चरम मौसम की घटनाओं के प्रति इसकी संवेदनशीलता को एक बार फिर उजागर करती है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे बचाव कार्यों में और बाधा आ सकती है।




