
Breaking Today, Digital Desk : पिछली बार के उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर कांग्रेस में अंदर ही अंदर कुछ पक रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद मनीष तिवारी ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। उनका कहना है कि इस चुनाव में क्रॉस-वोटिंग हुई है, और इसकी पूरी जांच होनी चाहिए।
सोचिए, उपराष्ट्रपति चुनाव में कुल 788 वोट डाले जाने थे, जिनमें से 780 वोट पड़े। लेकिन इनमें से 15 वोट ऐसे थे, जिन्हें अमान्य करार दे दिया गया। इस तरह कुल वैध वोटों की संख्या 765 रही। अब अगर हम देखें तो, जगदीप धनखड़ को 528 वोट मिले, और मार्गरेट अल्वा को 268 वोट मिलने चाहिए थे। ऐसा इसलिए क्योंकि लोकसभा और राज्यसभा में कांग्रेस के 36 सांसद हैं, और उनके साथ कुछ और पार्टियां भी थीं जिन्होंने अल्वा को समर्थन दिया था।
मनीष तिवारी ने इसी बात पर जोर दिया है। उन्होंने अपने बयान में कहा, “उपराष्ट्रपति चुनाव में 15 वोट अमान्य हो गए। जगदीप धनखड़ को 528 वोट मिले, जबकि मार्गरेट अल्वा को 182 वोट। इस हिसाब से विपक्ष को 268 वोट मिलने चाहिए थे। फिर ये 86 वोट आखिर कहां गए? क्या इस बात की जांच नहीं होनी चाहिए कि क्रॉस-वोटिंग कैसे और क्यों हुई?”
तिवारी के इन सवालों से कांग्रेस के अंदर एक नई बहस छिड़ गई है। ये सिर्फ वोटों के गणित का मामला नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर अनुशासन और एकजुटता पर भी सवाल उठाता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या वाकई इस मामले की कोई जांच होती है।






