Sliderराजनीति

बिहार चुनाव, पवन सिंह को क्यों नहीं छोड़ना चाहती BJP…

Bihar elections: Why doesn't the BJP want to leave Pawan Singh.

Breaking Today, Digital Desk : बिहार के चुनावी रण में, जहां हर सीट पर कांटे की टक्कर है, वहीं बीजेपी के लिए एक नाम चर्चा का विषय बना हुआ है – पवन सिंह. भोजपुरी सिनेमा के ‘पावर स्टार’ पवन सिंह, जो अपनी गायकी और अदाकारी के साथ-साथ कई विवादों के लिए भी जाने जाते हैं, बीजेपी के लिए एक ऐसी पहेली बन गए हैं जिसे वह सुलझाना तो चाहती है, लेकिन छोड़ना नहीं.

विवादों का साया और बीजेपी का मौन

पवन सिंह का नाम सुनते ही कई लोगों के मन में उनके विवादित गानों और निजी जिंदगी से जुड़े किस्से कौंध जाते हैं. उन पर जातिवादी गाने बनाने, महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक बोल का इस्तेमाल करने और कई बार सार्वजनिक तौर पर गलत व्यवहार करने के आरोप लगते रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि एक ऐसी पार्टी, जो अपनी छवि को लेकर इतनी सजग रहती है, वह पवन सिंह जैसे विवादित चेहरे को क्यों ढो रही है?

जातिगत समीकरण और वोट बैंक की राजनीति

इसका जवाब बिहार की जटिल जातिगत राजनीति में छिपा है. पवन सिंह राजपूत समुदाय से आते हैं, जिसकी बिहार में अच्छी खासी आबादी है. बीजेपी जानती है कि राजपूत वोट बैंक को अपने पाले में रखना कितना अहम है, खासकर तब जब RJD और कांग्रेस जैसे दल भी इस वोट बैंक पर अपनी नजर गड़ाए हुए हैं. पवन सिंह अपनी जाति में काफी लोकप्रिय हैं और उनके गाने ग्रामीण इलाकों में खूब सुने जाते हैं. ऐसे में बीजेपी को लगता है कि उन्हें छोड़ने का मतलब होगा, राजपूत वोटों का एक बड़ा हिस्सा गंवा देना.

स्टारडम का फायदा और भीड़ खींचने की ताकत

पवन सिंह सिर्फ एक गायक या अभिनेता नहीं, बल्कि एक ब्रांड हैं. उनकी फैन फॉलोइंग जबरदस्त है और उनकी रैलियों में भारी भीड़ उमड़ती है. बीजेपी इस स्टारडम का फायदा उठाना चाहती है. उन्हें लगता है कि पवन सिंह के जरिए वे युवाओं और खासकर उन लोगों तक पहुंच बना सकते हैं, जो शायद पारंपरिक राजनीति में ज्यादा दिलचस्पी नहीं रखते. उनकी मौजूदगी से चुनावी माहौल गरमाता है और मीडिया का ध्यान भी खींचा जाता है.

स्कैंडल और स्टारडम का अजीब रिश्ता

यह अजीब विडंबना है कि पवन सिंह के विवाद ही उनकी स्टारडम को और हवा देते हैं. उनके हर स्कैंडल के बाद लोग उन्हें और जानने लगते हैं, उनके गाने और देखे जाते हैं. बीजेपी भी शायद यही सोचती है कि जब तक विवाद उनकी लोकप्रियता को कम नहीं कर रहे, तब तक उन्हें बनाए रखने में कोई बुराई नहीं. यह राजनीति का एक कड़वा सच है, जहां कभी-कभी विवादित चेहरे भी वोट बैंक की खातिर स्वीकार्य हो जाते हैं.

क्या बीजेपी की यह रणनीति रंग लाएगी?

यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि बीजेपी की यह रणनीति कितनी सफल होती है. एक तरफ जहां पवन सिंह राजपूत वोटों को बीजेपी की तरफ खींच सकते हैं, वहीं उनके विवादित अतीत पार्टी की छवि को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं. देखना होगा कि बिहार की जनता इस ‘स्कैंडल और स्टारडम’ के खेल को कैसे देखती है.

Related Articles

Back to top button