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आखिर क्यों ऋषभ शेट्टी को गवारा नहीं कांतारा पर महिला किरदारों की आलोचना…

Why does Rishabh Shetty not like the criticism of female characters on Kantara.

Breaking Today, Digital Desk : कांतारा, जिसने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाई और दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाई, सिर्फ अपनी कहानी और अद्भुत दृश्यों के लिए ही नहीं, बल्कि कुछ विवादों के लिए भी चर्चा में रही। फिल्म में महिला किरदारों के चित्रण को लेकर कई सवाल उठे। अब, आखिरकार, निर्देशक और अभिनेता ऋषभ शेट्टी ने इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है और अपनी राय खुलकर सामने रखी है।

“मैं इस बात से सहमत नहीं हूँ,” ऋषभ शेट्टी ने साफ शब्दों में कहा, जब उनसे कांतारा में महिला किरदारों के चित्रण पर हो रही आलोचना के बारे में पूछा गया। उन्होंने आगे कहा, “मेरी फिल्मों में, मैं हमेशा अपने किरदारों को उनकी पृष्ठभूमि और कहानी के संदर्भ में देखता हूँ। कांतारा एक ऐसे गाँव की कहानी है जहाँ की अपनी संस्कृति और अपने नियम हैं। मैंने किरदारों को उसी दुनिया के हिसाब से गढ़ा है।”

ऋषभ ने यह भी बताया कि उनका इरादा कभी भी किसी भी लिंग को गलत तरीके से दिखाना नहीं था। “मैं सिर्फ कहानी के प्रति ईमानदार रहा हूँ। अगर कोई किरदार किसी खास तरीके से व्यवहार करता है, तो उसके पीछे एक वजह होती है, जो कहानी से जुड़ी होती है। मेरा मानना है कि दर्शक इसे समझ सकते हैं।”

उन्होंने उन लोगों को भी जवाब दिया जो उनकी फिल्मों को ‘पितृसत्तात्मक’ बता रहे थे। “मैं एक कलाकार हूँ और मेरा काम कहानियाँ सुनाना है। मेरी कहानियाँ समाज का दर्पण होती हैं। मैं समाज में जो देखता हूँ, उसे अपनी फिल्मों में दिखाने की कोशिश करता हूँ। यह दर्शकों पर निर्भर करता है कि वे इसे कैसे लेते हैं।”

कांतारा में महिला किरदारों को लेकर जो बहस छिड़ी थी, वह इस बात पर केंद्रित थी कि उन्हें फिल्म में पर्याप्त सशक्त और स्वतंत्र नहीं दिखाया गया। कुछ आलोचकों का मानना था कि महिला किरदारों को केवल पुरुषों के सहायक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। हालाँकि, ऋषभ शेट्टी के इस बयान से यह साफ हो गया है कि उनका दृष्टिकोण क्या था और वे अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता को लेकर कितने स्पष्ट हैं।

यह देखना दिलचस्प होगा कि ऋषभ के इस बयान के बाद यह बहस किस दिशा में जाती है। लेकिन एक बात तो तय है, कांतारा सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक घटना बन गई है जिसने दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया है और महत्वपूर्ण बातचीत को जन्म दिया है।

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