
Breaking Today, Digital Desk : अदालत के कटघरे में एक माँ की ममता और দায়িত্ব पर उस वक्त गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब एक जज ने बच्चे के प्रति लापरवाही और उपेक्षा को लेकर कड़ी फटकार लगाई। मामले की सुनवाई के दौरान जज ने माँ के व्यवहार पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “आपके मुवक्किल ने एक बच्चे के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को इस तरह नजरअंदाज करने की हिम्मत कैसे की?” यह टिप्पणी करते हुए अदालत ने बच्चे का भविष्य सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा फैसला सुनाया और उसकी कस्टडी पिता को सौंप दी।
यह मामला पारिवारिक न्यायालय में उस समय पहुँचा, जब एक पिता ने अपने बच्चे की बेहतर परवरिश और संरक्षण के लिए गुहार लगाई। पिता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि बच्चे की माँ अपनी निजी जिंदगी में इस कदर व्यस्त है कि उसे बच्चे के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की कोई परवाह नहीं है। याचिका के अनुसार, बच्चे की पढ़ाई, स्वास्थ्य और भावनात्मक जरूरतों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था, जिसका उसके कोमल मन पर गहरा नकारात्मक असर पड़ रहा था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि माँ के पास बच्चे की उपेक्षा के आरोपों का कोई ठोस जवाब नहीं था। जज ने टिप्पणी की कि माता-पिता के आपसी मतभेद का खामियाजा बच्चे को भुगतने नहीं दिया जा सकता। अदालत ने कहा कि हर बच्चे को एक सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण पाने का अधिकार है और इस मामले में माँ यह माहौल प्रदान करने में पूरी तरह से विफल रही है।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि बच्चे का हित सर्वोपरि है। पिता द्वारा प्रस्तुत किए गए सबूतों और बच्चे की मनोदशा को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि बच्चे का वर्तमान और भविष्य उसके पिता के साथ ही सुरक्षित है। इस निर्णय के बाद अदालत ने पिता को बच्चे की तत्काल हिरासत लेने का आदेश दिया और माँ को केवल निर्धारित समय पर ही बच्चे से मिलने की अनुमति दी। यह फैसला उन सभी मामलों के लिए एक नजीर है जहाँ अभिभावकों के आपसी झगड़े में बच्चों का भविष्य दांव पर लग जाता है।






