
Breaking Today, Digital Desk : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में मिग-21 लड़ाकू विमानों की भारतीय सशस्त्र बलों में दशकों की शानदार सेवा की जमकर तारीफ की है। उन्होंने विशेष रूप से बालाकोट एयरस्ट्राइक और ‘ऑप सिंधुराज’ जैसे अभियानों में इन विमानों के महत्वपूर्ण योगदान को सराहा। मिग-21, जिसे अक्सर भारतीय वायुसेना का ‘रीढ़’ कहा जाता है, ने कई युद्धों और अभियानों में देश की संप्रभुता की रक्षा की है।
बालाकोट एयरस्ट्राइक: जब मिग-21 ने दिखाया अपना दम
बालाकोट एयरस्ट्राइक 2019 में हुई थी, जब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के भीतर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इस मिशन में मिग-21 बाइसन विमानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान, जो एक मिग-21 बाइसन उड़ा रहे थे, ने पाकिस्तानी वायुसेना के एक आधुनिक एफ-16 लड़ाकू विमान को मार गिराया था। यह घटना मिग-21 की युद्ध क्षमताओं और भारतीय पायलटों के असाधारण कौशल का प्रमाण है।
‘ऑप सिंधुराज’ और मिग-21 का बहुमुखी योगदान
‘ऑप सिंधुराज’ (Operation Sindhuraj) भारतीय नौसेना का एक महत्वपूर्ण अभियान था, जिसमें मिग-21 विमानों ने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इन विमानों का उपयोग विभिन्न प्रकार के मिशनों में किया गया, जिनमें टोही उड़ानें, हवाई निगरानी और दुश्मन के ठिकानों पर हमला करना शामिल था। राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि मिग-21 ने न केवल हवाई युद्ध में अपनी क्षमता साबित की है, बल्कि विभिन्न रणनीतिक अभियानों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
दशकों की सेवा: मिग-21 का गौरवशाली इतिहास
मिग-21 विमानों को 1960 के दशक की शुरुआत में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। तब से लेकर अब तक, इन विमानों ने 1971 के भारत-पाक युद्ध, कारगिल युद्ध और कई अन्य छोटे-बड़े संघर्षों में देश की सेवा की है। समय के साथ, इन विमानों को कई उन्नयन (अपग्रेड) मिले हैं, जिससे उनकी परिचालन क्षमताएं बढ़ी हैं। हालांकि, अब ये पुराने हो रहे हैं और इन्हें धीरे-धीरे नए और अधिक आधुनिक विमानों से बदला जा रहा है, लेकिन इनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
भविष्य की राह
राजनाथ सिंह ने कहा कि मिग-21 विमानों की विरासत हमें भविष्य के लिए प्रेरणा देती रहेगी। भारतीय वायुसेना लगातार आधुनिकीकरण की दिशा में काम कर रही है और राफेल जैसे नए लड़ाकू विमानों को शामिल कर रही है। लेकिन मिग-21 ने जो मानक स्थापित किए हैं, वे हमेशा भारतीय वायुसेना के इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय बने रहेंगे।




