स्वामी विवेकानन्द युवा सशक्तीकरण योजना में बड़ा बदलाव अब सिर्फ टैबलेट का होगा वितरण, स्मार्टफोन की खरीद पर रोक

लखनऊ प्रदेश सरकार ने युवाओं के तकनीकी सशक्तीकरण को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में स्वामी विवेकानन्द युवा सशक्तीकरण योजना के अंतर्गत अब केवल टैबलेट का निःशुल्क वितरण किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस निर्णय के साथ ही पूर्व में निर्धारित 25 लाख स्मार्टफोन क्रय किए जाने से संबंधित शासनादेश संख्या ।/860757/2025(1480649), दिनांक 24.01.2025 को भी निरस्त कर दिया गया है।
गौरतलब है कि यह योजना प्रदेश में वर्ष 2022 से लागू है और इसे 5 वर्षों के लिए संचालित किया जा रहा है। इससे पहले 12 जुलाई 2022 को हुई मंत्रिपरिषद बैठक में इस योजना को हरी झंडी दी गई थी, जिसके तहत स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, कौशल विकास, पैरामेडिकल सहित विभिन्न शिक्षण/प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत नामांकित युवाओं को निःशुल्क टैबलेट अथवा स्मार्टफोन उपलब्ध कराए जा रहे थे।
अब योजना में संशोधन करते हुए केवल टैबलेट वितरण पर ज़ोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि टैबलेट की बड़ी स्क्रीन, बेहतर बैटरी क्षमता, प्रोडक्टिविटी एप्स का बेहतर संचालन, मल्टीटास्किंग क्षमता, और शैक्षिक उपयोग में दक्षता जैसे पहलुओं के चलते यह स्मार्टफोन की तुलना में छात्रों व युवाओं के लिए अधिक लाभकारी सिद्ध होगा। इससे योजना के उद्देश्यों की पूर्ति अधिक सुगमता से की जा सकेगी और डिजिटल शिक्षा व कौशल विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी।
योजना के अंतर्गत अब तक प्रदेश के विभिन्न जनपदों में कुल 60.05 लाख टैबलेट/स्मार्टफोन की आपूर्ति की जा चुकी है, जिसमें से 16.75 लाख टैबलेट एवं 36.75 लाख स्मार्टफोन, अर्थात कुल 53.50 लाख उपकरणों का वितरण 9 अप्रैल 2025 तक किया जा चुका है। शेष उपकरणों का वितरण प्रक्रियागत स्तर पर जारी है।
इस योजना के तहत वितरित टैबलेट युवाओं को न केवल शैक्षिक गतिविधियों में मदद करेंगे, बल्कि वे इन उपकरणों का उपयोग सरकारी, गैर-सरकारी नौकरियों की तैयारी, स्वरोजगार व स्टार्टअप में भी कर सकेंगे। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सरकार द्वारा 2,000 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है, जो योजना के व्यापक क्रियान्वयन को दर्शाता है।
सरकार के इस नए निर्णय को विशेषज्ञ डिजिटल समावेशन, कौशल विकास और युवा सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं। यह फैसला प्रदेश को डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में ‘डिजिटल यूपी’ की मजबूत नींव रखता है।






