
Breaking Today, Digital Desk : बिहार की राजनीति में आजकल महिलाओं की भूमिका बहुत अहम हो गई है, और ये बात किसी से छिपी नहीं है। अगर हम पिछले कुछ चुनावों पर नज़र डालें, खासकर जब से नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने हैं, तब से महिला वोटर बीजेपी और NDA के लिए एक मज़बूत वोट बैंक बनकर उभरी हैं। बिहार विधानसभा चुनावों में भी ये बात साफ़ दिखती है कि महिलाएँ ही जीत-हार तय करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं।
एक मज़बूत वोट बैंक:
प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं के लिए कई योजनाएँ चलाई हैं, जिनका असर सीधे ज़मीन पर दिखता है। उज्ज्वला योजना से लेकर हर घर नल का जल जैसी स्कीम्स ने महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाया है। इन्हीं वजहों से महिलाएँ अब बीजेपी और NDA को अपना हमदर्द मानने लगी हैं। उनकी वोटिंग पैटर्न में भी ये साफ़ दिखता है कि वे इन पार्टियों पर ज़्यादा भरोसा कर रही हैं। RJD जैसी पार्टियों को इस बात पर गौर करना होगा कि वे कैसे इस बड़े वोटर वर्ग को अपनी तरफ खींचें।
क्यों बनी हैं महिलाएँ खास?
पहले अक्सर माना जाता था कि महिलाएँ घर के पुरुषों की सलाह पर वोट देती हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं है। बिहार की महिलाएँ अब जागरूक हो गई हैं और अपने मुद्दों पर खुद फ़ैसला लेती हैं। शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता ने उन्हें ये ताक़त दी है। उन्हें पता है कि कौन सी सरकार उनके लिए बेहतर काम कर रही है। यही वजह है कि वे अब साइलेंट वोटर नहीं रहीं, बल्कि एक ऐसा वर्ग हैं जो चुनाव नतीजों को पलटने की ताक़त रखता है।
आगे की राह:
आने वाले चुनावों में भी महिला मतदाताओं की भूमिका निर्णायक होने वाली है। बीजेपी और NDA अपनी इस मज़बूत पकड़ को बनाए रखने की पूरी कोशिश करेंगे, वहीं RJD जैसी पार्टियों को महिलाओं के मुद्दों पर ज़्यादा ध्यान देना होगा और उन्हें यह विश्वास दिलाना होगा कि वे भी उनके हित में काम कर सकती हैं। बिहार का भविष्य कहीं न कहीं इन महिला वोटरों के हाथ में ही है।






